जीएसके और वीर बायोटेक्नोलाजी की ओर से विकसित की गई सोट्रोविमैब एक खुराक वाली एंटीबाडी है। यह कोरोना वायरस के बाहरी सतह पर स्पाइक प्रोटीन से जुड़कर काम करती है। इसके जरिए वायरस को मानव कोशिका में प्रवेश करने से रोका जा सकता है।
दुनिया में ओमिक्रॉन के खतरे के बीच ब्रिटेन से अच्छी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि औषधि नियामक ने यहां कोरोना के एक नए एंटीबाडी उपचार को मंजूरी दे दी है। उम्मीद की जा रही है कि यह इलाज कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट पर भी असर कर सकती है। ब्रिटेन की औषधि एवं स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी (एमएचआरए) ने गुरुवार को बताया कि शेवुडी या सोट्रोविमैब नाम की एंटीबॉडी को हरी झंडी दी गई है। यह हल्के से मध्यम संक्रमण वाले मरीजों पर कारगर साबित हुई है। जीएसके और वीर बायोटेक्नोलाजी की ओर से विकसित की गई सोट्रोविमैब एक खुराक वाली एंटीबाडी है। यह कोरोना वायरस के बाहरी सतह पर स्पाइक प्रोटीन से जुड़कर काम करती है। इसके जरिए वायरस को मानव कोशिका में प्रवेश करने से रोका जा सकता है।
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एमएचआरए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जून रैन ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे पास एक ऐसा इलाज है, जिससे कोरोना को हराया जाता है। यह ऐसे लोगों पर ज्यादा कारगर है, जिनमें गंभीर रोग विकसित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इसमें गुणवत्ता, सुरक्षा व प्रभाव को लेकर समझौता नहीं किया गया है। 12 वर्ष व उससे अधिक आयु के 40 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले व्यक्तियों के इलाज में सोट्रोविमैब का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे नसों के जरिये 30 मिनट में चढ़ाया जाएगा।
एमएचआरए ने कहा कि यह कहना अभी ठीक नहीं है कि सोट्रोविमैब, ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कितना प्रभावी है। हम इस बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि, प्रारंभिक अध्ययन के मुताबिक, यह वायरस के स्पाइक प्रोटीन को निशाना बनाती है। ऐसे में सोट्रोविमैब को सभी वैरिएंट के खिलाफ काम करना चाहिए।
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फाइजर भी युद्धस्तर पर काम कर रहा
वहीं, ओमिक्रॉन के खतरे के बीच फाइजर ने युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। फाइजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एल्बर्ट बोउर्ला ने कहा कि फाइजर ने पहले ही बीटा और डेल्टा स्वरूप से बचाव के लिए उन्नत टीका तैयार कर लिया है। अब हम ओमिक्रॉन के खिलाफ टीका विकसित करने की ओर देख रहे हैं।