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Thailand: 'विश्व हिंदू कांग्रेस' का समापन, समाज को मजबूत करने का लिया गया संकल्प; मुंबई में होगा अगला आयोजन

Sun, 26 Nov 2023 05:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक

सार

Thailand: थाईलैंड की राजधानी में आयोजित 'विश्व हिंदू कांग्रेस' सम्मेलन हिंदू संगठनों के बीच एकता को मजबूत करने और सनातन धर्म के खिलाफ नफरत और पूर्वाग्रहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
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विश्व हिंदू कांग्रेस। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिंदू संगठनों के बीच एकता को मजबूत करने और सनातन धर्म के खिलाफ नफरत व पूर्वाग्रहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के संकल्प के साथ तीन दिवसीय 'विश्व हिंदू कांग्रेस' का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान प्रतिनिधियों ने विदेश में चुने गए हिंदू जन प्रतिनिधियों का समर्थन करने का भी संकल्प लिया, ताकि वे संगठित होकर और आपस में बातचीत को बढ़ाकर उनके खिलाफ चल रहे राजनीतिक माहौल से निपट सकें। वहीं, आयोजकों ने यह भी एलान किया कि अगला 'विश्व हिंदू कांग्रेस' 2026 में मुंबई में आयोजित किया जाएगा।

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कार्यक्रम में हर प्रतिनिधि को एक संदेश के साथ लड्डू के डिब्बे वितरित किए गए। जिन पर लिखा गया था- 'दुर्भाग्य से हिंदू समाज एक नरम लड्डू जैसा दिखता है, जिसे आसानी से टुकड़ों में तोड़ा जा सकता है। फिर आसानी से निगल लिया जा सकता है।' इसमें आगे लिखा गया- 'एक बड़ा कठोर लड्डू मजबूती से बंधा और एकजुट होता है और इसे टुकड़ों में नहीं तोड़ा जा सकता है। हिंदू समाज एक बड़े कठोर लड्डू की तरह होना चाहिए, जिसे तोड़ना मुश्किल हो और दुश्मन ताकतों के खिलाफ खुद की रक्षा करने में सक्षम हो।'

बैंकॉक में आयोजित सम्मेलन हिंदू संगठनों के बीच एकता को मजबूत करने और सनातन धर्म के खिलाफ नफरत और पूर्वाग्रहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। आयोजकों के मुताबिक, इसमें 61 देशों के 2,100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्घाटन शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया था। आध्यात्मिक नेता माता अमृतानंदमयी देवी ने रविवार को समापन भाषण दिया। आरएसएस प्रमुख ने दुनिया भर में रहने वाले हिंदुओं से लोगों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म शांति और खुशी का मार्ग खोलता है और पूरी मानवता को सभी प्राणियों के अस्तित्व की आत्मा मानता है।
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विश्व हिंदू कांग्रेस के संस्थापक स्वामी विज्ञानानंद ने कहा, 'कोविड महामारी के दौरान हिंदुओं तक पहुंचने की प्रक्रिया धीमी हो गई थी। हम अब इस प्रक्रिया को फिर से शुरू कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि कॉलेज और अन्य संस्थानों का निर्माण करने वाले ईसाई संगठनों के नियंत्रण से मंदिर की भूमि को फिर से हासिल करने पर फोकस किया जाएगा। विज्ञानानंद ने कहा, 'ये मंदिर की भूमि है जिनके पट्टे की अवधि समाप्त हो गई है। ये हमारी कानूनी जमीन है, उन्हें इसे वापस सौंपना होगा।'
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