मोदी ने ट्रंप के सामने अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कहा, यह देश के सामने 70 साल से बड़ी चुनौती था, जिसे देश ने फेयरवेल दे दिया। अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को विकास से और समान अधिकारों से वंचित रखा था। इस स्थिति का लाभ आतंकवाद और अलगाववाद बढ़ाने वाली ताकतें उठा रही थीं।
अनुच्छेद 370 को खत्म करके दो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बनाए गए। जो अधिकार भारत के लोगों को था, वही अधिकार वहां के लोगों को भी मिल गया है। मोदी ने कहा कि मैं आपसे आग्रह करता हूं कि हिंदुस्तान के सभी सांसदों के सम्मान के लिए खडे़ हो जाएं। उनकी इस अपील पर लोगों ने खडे़ होकर तालियां भी बजाईं।
अगर व्यापार के मसले पर अमेरिका से कोई समझौता होता है, भारत शुल्क कम करता है और नियमों में कोई ढील देता है तो उसका फायदा यूएनजीसी की बैठक में कश्मीर के मसले पर भारत को हो सकता है।
सोमवार को डोनल्ड ट्रंप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद वो मंगलवार को फिर पीएम नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। एक तरह से पीएम नरेंद्र मोदी के पास मौका है कि वो यूएनजीसी की बैठक से पहले ट्रंप का समर्थन हासिल कर लें।
लेकिन, पाकिस्तान को अमेरिका का खुले तौर पर साथ मिलना मुश्किल लग रहा है। फिलहाल वैश्विक आतंकवाद को लेकर अमेरिका की नजर में पाकिस्तान छवि अंतराराष्ट्रीय स्तर पर जरूर कमतर हुई है।
दरअसल अफगानिस्तान में तालिबान से शांति वार्ता को लेकर अमेरिका के लिए पाकिस्तान बहुत अहम बना हुआ था। अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहता है और तालिबान की पाकिस्तान से नजदीकी के कारण उसे पाकिस्तान के सहयोग की जरूरत है।
पाकिस्तान को भी अपने आर्थिक हालात से निपटने के लिए अमेरिका की मदद चाहिए। ऐसे में तालिबान के मसले पर पाकिस्तान से एक सकारात्मक भूमिका निभाने की उम्मीद थी। यही वजह हो सकती है कि इमरान खान से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कश्मीर मसले पर मध्यस्थता की पेशकश की थी।
लेकिन, तालिबान से वार्ता विफल होने के बाद फिलहाल पाकिस्तान का इतना महत्व नहीं रहा। ऐसे में अमेरिका के लिए पाकिस्तान की स्थिति कमजोर दिखाई देती है। वहीं दूसरी ओर यहां भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है अगर वो व्यापार में अमेरिका के साथ सहयोग करे।
जिसका सीधा फायदा पीएम नरेंद्र मोदी को भारत में भी मिलेगा। अमेरिका से अच्छे संबंध होना न सिर्फ भारतीय बाजारों में एक अच्छा माहौल बनाएगा बल्कि लोगों में भी मोदी की एक मजबूत छवि बनाएगा। दूसरी ओर देखें तो भारत और रूस के संबंध भी हमेशा से ही बेहतर रहे हैं। ऐसे में दुनिया की दो महाशक्तियों के साथ भारत के अच्छे संबंध विश्व में उसकी छवि को और भी बेहतर बनाते नजर आ रहे हैं।