नेपाल में इस समय इस सवाल पर अटकलों का दौर है कि आखिर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी को तोड़ने पर क्यों आमादा हैं। ताजा खबर यह है कि उन्होंने पार्टी के सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल के साथ मेल-मिलाप कराने की कोशिशों को ठुकरा दिया है। कुछ पार्टी नेता उनके पास इस प्रस्ताव के साथ पहुंचे कि अगर वे पार्टी की बैठक बुलाने पर राजी हो जाएं, तो मसले का हल निकल सकता है।
लेकिन एक नेपाली अखबार में छपी खबर के मुताबिक ओली ने कहा कि किसी बैठक की जरूरत नहीं है। ओली ने ये धमकी भी दी कि अगर पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है, तो “एक बड़ा कदम” उठाएंगे। ऐसा वो पहले भी कई बार कह चुके हैं।
नेपाल के सियासी हलकों में इस पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि ओली आखिर क्या कदम उठा सकते हैं। क्या वे कोई अध्यादेश ला सकते हैं, जिससे पार्टी के विभाजन के प्रावधानों को आसान किया जा सके? 2018 में तीन गुटों के विलय से नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनी थी। ओली, दहल और माधव कुमार नेपाल उन गुटों के नेता थे। उन गुटों का भले पार्टी विलय हो गया, लेकिन पार्टी के अंदर तीनों नेताओं के अलग-अलग खेमे कायम रहे हैं।
इसका मतलब यह है कि अगर दो गुट मिल जाएं, तो तीसरा गुट अल्पमत में आ जाता है। फिलहाल ओली गुट की ऐसी ही हालत समझी जा रही है। इसके बावजूद ओली अड़े हुए हैं। सोमवार को खबर आई थी कि उन्होंने अपने करीबी नेताओं से कहा है कि वो पार्टी को विभाजित करने के लिए तैयार हैं। आपको याद होगा कि पिछले दिनों ये चर्चा आम थी कि ओली ने अपनी अलग पार्टी के पंजीकरण के लिए निर्वाचन आयोग में अर्जी दे रखी है।
पुष्प कमल दहल गुट के साथ ओली का टकराव काफी समय से चल रहा है। मगर अब तक मेलमिलाप हो जाता था। पिछले दिनों करनाली प्रांत की सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे का हल भी बातचीत से निकल आया था। इस प्रांत में दहल समर्थक नेता मुख्यमंत्री हैं। माना गया था कि उनके खिलाफ ओली गुट ने अविश्वास प्रस्ताव पेश कराया था। अब चर्चा है कि ओली या तो दहल से पीछा छुड़ाना चाहते हैं या फिर उनकी कोशिश है कि दहल उनके आगे समर्पण कर दें।
ओली के करीबी नेताओं का आरोप है कि दहल ओली सरकार के कामकाज में अड़ंगेबाजी करते रहे हैं। इससे ही मौजूदा हालत पैदा हुई है। ओली समर्थक नेता ईश्वर पोखरेल ने सोमवार को कहा कि कुछ नेता पार्टी के गठन के समय बनी सहमति से पीछे हट गए हैं और गुटबाजी जारी रखे हुए हैं। पोखरेल ने दहल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था। उन्होंने कहा कि जो नेता निजी स्वार्थों के लिए पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनकी गतिविधियों पर एतराज जताए जाने की जरूरत है।
नेपाली मीडिया में कम्युनिस्ट पार्टी के दहल समर्थक कुछ नेताओं के हवाले से कहा गया है कि दहल अभी कोई बड़ा कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं। वे अभी भी बातचीत से रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें अहसास है कि पार्टी के अंदर ओली अल्पमत में हैं। पार्टी के दूसरे हलकों से भी उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। इसलिए वे इंतजार करने के मूड में हैं।
लेकिन ओली के बारे में कहा जाता है कि वे आसानी से अपने इरादे नहीं बदलते। अगर हालात उन्हें अपने माफिक मुड़ते नहीं दिखते, तो वे सचमुच पार्टी को विभाजित करने की हद तक चले जाएंगे। साफ है, नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल गहरा रहा है।