दुनियाभर में एमपॉक्स वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एमपॉक्स को लेकर एक बार फिर चेतावनी दी है। स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि शारीरिक संपर्क की तुलना में ड्रॉपलेट्स (लार की बूंदे) वायरस को फैलाने का एक मामूली जरिया है। साथ ही डब्ल्यूएचओ ने वायरस कैसे फैलता है, उस पर और अधिक शोध करने की जरूरत पर जोर दिया।
एमपॉक्स के बने रहने की अवधि पांच से 21 दिनों तक हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बुखार आमतौर पर एक से तीन दिनों तक रहता है। इसके बाद शरीर पर दाने होने लगते हैं, जो दो से चार सप्ताह तक रह सकते हैं।
एमपॉक्स कैसे फैलता है?
क्या बोलीं डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता ?
हालांकि, डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता मार्गरेट हैरिस ने आज कहा कि अगर वायरस वाले व्यक्ति के शरीर पर घाव हैं, यदि आप किसी से करीब से बात कर रहे हैं, किसी के सामने सांस ले रहे हैं, शारीरिक संपर्क में आ रहे तो वायरस फैलने की संभावना है। मगर वायरस के फैलने के लिए यह सब मामूली जरिया हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'जब आप किसी से बात कर रहे होते हैं, तो उस समय कुछ डॉपलेट्स थूक रहे होते हैं, लेकिन यह वायरस फैलने का एक बहुत कारण नहीं है। यहां तक कि हवा के माध्यम से या दूर से बात करना भी वायरस फैलने का कारण नहीं है।'
डब्ल्यूएचओ एमपॉक्स वाले लोगों, उनके करीबी संपर्कों और उनका इलाज करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए फेसमास्क के इस्तेमाल की सलाह देता है।
क्या एमपॉक्स की वैक्सीन है?
एमपॉक्स से लड़ने के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा बताई गई वैक्सीन है। हालांकि, केवल उन लोगों को टीका लगवाना चाहिए जो जोखिम में हैं। डब्ल्यूएचओ ने एमपॉक्स के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण की सिफारिश नहीं की है।
भारत कैसे लड़ने की तैयारी कर रहा?
भारत में वर्तमान में कोई सक्रिय एमपॉक्स मामले नहीं हैं। सरकार ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाओं में अधिकारियों को आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बारे में सतर्क रहने का आदेश दिया है। दरअसल, इन देशों में वायरस के मामले सामने आए हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने भारत में संभावित एमपॉक्स मामलों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल जारी किए हैं। विभिन्न सरकारी अस्पतालों को एमपॉक्स के संदिग्ध और पुष्ट मामलों के लिए आइसोलेशन रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया था।