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डब्लूएचओ की रिपोर्ट में खुलासाः प्रदूषित हवा में सांस ले रही दुनिया की 90 फीसदी आबादी

Wed, 28 Sep 2016 03:03 AM IST
एजेंसी/ जेनेवा/नई दिल्ली
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- फोटो : Getty
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दुनिया में 10 में से नौ लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। प्रदूषण के चलते विश्व में 60 लाख से ज्यादा लोगों को हर साल जान गंवानी पड़ती है। दक्षिण एशिया क्षेत्र में ही हर साल करीब आठ लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है, जिसमें 75 फीसदी मौतें अकेले भारत में होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। डब्लूएचओ ने प्रदूषण के खिलाफ तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई है।
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रिपोर्ट कहती है कि प्रदूषण की सबसे ज्यादा मार गरीब और विकासशील देशों पर पड़ रही है। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 90 फीसदी गरीब या मध्य आय वर्ग वाले देशों में होती हैं। डब्लूएचओ रिपोर्ट एंबीएंट एयर पॉल्यूशन 2016 नाम की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में प्रदूषण की वजह से हुई आठ लाख मौतें में से 6,21,138 मौतें केवल भारत में हुई हैं। प्रदूषित हवा की वजह से लोग हृदय, फेफड़ों और धमनी संबंधी रोगों और कैंसर के शिकार होकर जान गंवा रहे हैं।
 
डब्लूएचओ के जन स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग की प्रमुख मारिया नीरा ने कहा कि आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। शहरों में तो प्रदूषण गंभीर समस्या है ही, लेकिन गांवों की हवा भी उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रदूषित है। उन्होंने इसे लोगों के स्वास्थ्य के लिए आपात स्थिति करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सड़कों पर वाहनों की संख्या घटानी होगी, कचरे के निस्तारण की बेहतर व्यवस्था करनी होगी और रसोई के लिए स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना होगा।
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जानिए क्या है दुनिया भर में प्रदूषण की स्थिति?

दक्षिण पूर्व एशिया के डब्लूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल ने तत्काल कदम उठाना होगा। रिपोर्ट में घर के अंदर और बाहर के प्रदूषण के आंकड़े लिए गए हैं। घर के बाहर का प्रदूषण 30 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार है, जबकि वैसे घरों के अंदर का प्रदूषण भी इतना ही खतरनाक है, जहां कोयले या लकड़ियों को जलाकर खाना बनाया जाता है।  

3000 से ज्यादा जगहों से लिए आंकड़े
पूरी दुनिया में 3000 से ज्यादा जगहों से आंकड़े जुटाकर डब्लूएचओ की यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें कहा गया है कि दुनिया की 92 फीसदी आबादी ऐसी जगहों पर रह रही है, जहां हवा की गुणवत्ता डब्लूएचओ के मानकों के मुताबिक खराब है।

रिपोर्ट में हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले कणों (पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5) को आधार माना गया है। पीएम 2.5 में सल्फेट और ब्लैक कार्बन जैसे टॉक्सिन भी शामिल हैं, जो फेफड़ों में जाकर गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। पीएम2.5 की प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम मात्रा वाली हवा को खराब माना जाता है। यूएन ने सेटेलाइट डाटा और जमीन पर लिए डाटा से यह रिपोर्ट तैयार की है।  

दुनिया भर में प्रदूषण की स्थिति
- 2015 में विश्व के सबसे प्रदूषित 20 शहरों में 10 भारत के थे।
- इनमें ग्वालियर (2), इलाहाबाद (3), पटना(6), रायपुर(7), दिल्ली(11), लुधियाना(12),  कानपुर(15), खन्ना(16), फिरोजाबाद(17), लखनऊ(18)
(स्रोत : विश्व स्वास्थ्य संगठन)

प्रदूषण से मौतों में 94 फीसदी मौतें गैर संक्रामक रोगों की वजह से होती हैं, जिसमें कार्डियोवेस्कुलर रोग, पक्षाघात, धमनियां रुकना, फेफड़ों का कैंसर जैसे रोग शामिल।
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