चीन-अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह ट्रंप ने अमेरिका में पढ़ने वाले चीनी छात्रों के वीजा रद्द करने की बात कही थी। साथ ही चीन पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था। चीन ने इसका पलटवार किया। अब दोनों देश एक बार फिर बातचीत के जरिये तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करने की कवायद शुरू हो गई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वार्ता हो सकती है। टैरिफ वार के बाद अमेरिका की ओर से चीनी छात्रों के वीजा रद्द करने और अन्य प्रतिबंधों के चलते दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ रही है।
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अगर दोनों नेता बातचीत करते हैं तो कॉल का ब्योरा दिया जाएगा। इससे पहले रविवार को व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसिट ने कहा था कि इस सप्ताह ट्रंप और शी के बीच बातचीत होने की उम्मीद है।
ट्रंप के बयान के बढ़ा विवाद
चीन और अमेरिका के बीच विवाद ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि 'बुरी खबर यह है कि चीन ने हमारे साथ अपने समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन किया है, जो कुछ लोगों के लिए चौंकाने वाली बात नहीं है। अब 'मिस्टर नाइस गाइ' बनने की जरूरत नहीं है।' ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात करेंगे और कोशिश करेंगे कि कोई समाधान निकले।
चीन ने जताई थी नाराजगी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के चीनी छात्रों के वीजा रद्द करने और कंप्यूटर चिप निर्यात नियंत्रण निर्देश जारी करने के फैसले पर चीन ने नाराजगी जाहिर की थी। चीन ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उसके हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाए हैं। साथ ही अमेरिका नए आर्थिक और व्यापारिक तनाव को भड़का रहा है।चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि ट्रंप के फैसले पिछले महीने जेनेवा में व्यापार चर्चाओं के दौरान बनी आम सहमति का उल्लंघन हैं।
अमेरिका-चीन ने टैरिफ को 90 दिनों के लिए घटाया था
उल्लेखनीय है कि हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच जेनेवा में बैठक हुई थी। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे पर लगाए गए टैरिफ को 90 दिनों के लिए घटा दिया था। अमेरिका ने चीनी सामान पर टैरिफ को 145 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया था। वहीं, चीन ने भी अमेरिकी सामान पर अपने करों को 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था।