पश्चिम एशिया युद्धविराम में पाकिस्तान की चमकदार छवि झूठी निकली। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया और शहबाज शरीफ केवल दर्शक बने रहे। इतना ही नहीं व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को केवल संदेशवाहक बनाया, किसी भी फैसले में स्वतंत्र भूमिका तक नहीं दी।
पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान ने दो हफ्तों के युद्धविराम की घोषणा की। इस दौरान पाकिस्तान का नाम खुब चर्चा में रहा। इसका कारण है कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान ने खुद को शांति का मध्यस्थ दिखाने की कोशिश की। हालांकि रिपोर्ट बताती है कि असल में कहानी कुछ और है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि इस युद्धविराम में दरअसल, पाकिस्तान कोई तटस्थ दल नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस के हाथों की केवल कठपुतली बनकर रह गया। आइए यहां समझते हैं कैसे?
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आगे की वार्ता अब इस्लामाबाद में होगी
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत इस सप्ताहांत इस्लामाबाद में होने वाली है, जिसमें दोनों पक्ष सप्ताहों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए आमने-सामने चर्चा करेंगे। अमेरिकी दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरानी दल का नेतृत्व संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ करेंगे।