रूस के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, जिनमें पुतिन को 80 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। इसके साथ ही पुतिन का पांचवी बार रूस का राष्ट्रपति बनना तय है। यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन को काफी विरोध झेलना पड़ा, इसके बावजूद पुतिन ने जिस तरह से जीत दर्ज की है, उससे रूस की सत्ता पर पुतिन की पकड़ का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पुतिन ने अपने करियर की शुरुआत खुफिया एजेंसी केजीबी के एजेंट के तौर पर की थी और आज वह न सिर्फ रूस बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक हैं। तो आइए जानते हैं कि कैसा रहा है पुतिन का अब तक का सफर-
लेनिनग्राड में हुआ जन्म
व्लादिमीर पुतिन का जन्म सोवियत रूस के लेनिनग्राड शहर में 7 अक्तूबर 1952 को हुआ था। जब नाजी सेनाओं ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय लेनिनग्राड पर हमला किया था, तब पुतिन के एक भाई विक्टर की नाजी सेनाओं से लड़ते हुए मौत हुई थी। पुतिन का शुरुआती जीवन लेनिनग्राड (आज के सेंट पीट्सबर्ग) में बीता और यही की लेनिनग्राड स्टेट यूनिवर्सिटी से पुतिन ने अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद पुतिन सोवियत रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी में बतौर एजेंट शामिल हो गए। केजीबी में काम के दौरान पुतिन की लेफ्टिनेंट कर्नल पद तक पदोन्नति हुई।
रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के चीफ भी रहे
सोवियत संघ के विघटन के बाद केजीबी की जगह रूस में रूस फेडरल सिक्योरिटी सर्विस का गठन हुआ। साल 1996 में पुतिन सेंट पीट्सबर्ग से मॉस्को शिफ्ट हो गए और साल 1998 में रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के चीफ बन गए। खुफिया एजेंसियों में 16 साल का करियर बिताने के बाद पुतिन ने राजनीति में उतरने का फैसला किया। एफएसबी के चीफ रहने के कुछ साल बाद ही रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येलत्सिन के खास बन गए। येल्तसिन ने ही पुतिन को रूस का डिप्टी पीएम और फिर कार्यवाहक पीएम बनाया। जब येल्तसिन ने इस्तीफा दिया तो पुतिन ही रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति बने और फिर मार्च 2000 में पहली बार आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति चुने गए।
सत्ता पर काबिज रहने के लिए संविधान बदला
पुतिन साल 2000-2004 और फिर 2004 से लेकर 2008 तक लगातार दो कार्यकाल तक रूस के राष्ट्रपति रहे। रूस में पहले राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता था। रूस के संविधान में प्रावधान था कि कोई भी नेता लगातार तीन कार्यकाल तक राष्ट्रपति नहीं रह सकता। ऐसे में पुतिन ने अपने करीबी दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बनाया। मेदवेदेव ने पुतिन को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। माना जाता है कि मेदवेदेव के कार्यकाल में भी पुतिन ने ही पर्दे के पीछे से रूस की सत्ता चलाई। साल 2012 में पुतिन फिर से रूस के राष्ट्रपति चुने गए। उस दौरान पुतिन को घरेलू स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।
साल 2018 में पुतिन चौथी बार रूस के राष्ट्रपति बने और उस समय 76 फीसदी वोट पुतिन को ही मिले। साल 2020 में पुतिन ने संविधान में संशोधन कर लंबे समय तक रूस की सत्ता में रहने का रास्ता साफ कर लिया। पुतिन के कार्यकाल में ही क्रीमिया का रूस में विलय हुआ। रूस ने सीरिया मामले में हस्तक्षेप किया और खुलकर सीरियाई राष्ट्रपति का समर्थन किया। फरवरी 2022 में पुतिन ने सभी को चौंकाते हुए यूक्रेन पर हमला कर दिया। दरअसल यूक्रेन नाटो में शामिल होने की तैयारी कर रहा था, जिसके चलते पुतिन ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। अभी भी यूक्रेन में युद्ध जारी है और पुतिन यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके हैं।
दुश्मनों को जहर देकर मारने के लगे आरोप
पुतिन पर अपने विरोधियों को जहर देकर मारने के आरोप लगते रहे हैं। नवंबर 2006 में पूर्व केजीबी एजेंट और ब्रिटेन के नागरिक एलेक्जेंडर लितविनेनको को जहर देकर मारने के आरोप पुतिन पर लगे। लितविनेनको ने ही ये आरोप लगाए थे। साल 2018 में रूस के एक पूर्व जासूस को भी लंदन में जहर दिया गया। इसका भी आरोप पुतिन पर लगा। पुतिन के सबसे बड़े विरोधी माने जाने वाले एलेक्सी नवलनी की भी हाल ही में रूस की जेल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। रूस की सरकार ने इस मामले में अपनी किसी संलिप्तता से इनकार किया है, लेकिन आरोप पुतिन पर ही लग रहे हैं। कभी पुतिन के खास रहे वैगनर ग्रुप बनाने वाले प्रिगोझिन की भी बीते दिनों विमान हादसे में मौत हो गई थी। प्रिगोझिन ने पुतिन के खिलाफ बगावत की थी। यही वजह है कि प्रिगोझिन की मौते के पीछे भी पुतिन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।