1994 में मंडेला के दक्षिण अफ्रीका के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले राष्ट्रपति बनने के बाद, उन्होंने 1999 तक मूला को इस्लामिक गणराज्य ईरान में दक्षिण अफ्रीकी राजदूत के रूप में नियुक्त किया।
दक्षिण अफ्रीका में भारतयी मूल के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यकर्ता मूसा 'मोसी' मूला का लंबी बीमारी के बाद शनिवार शाम निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ कई अभियान भी चलाए। क्रिस्टियाना के छोटे से शहर में मूला ट्रांसवाल इंडियन कांग्रेस में शामिल हो गए यहां उन्होंने रंगभेद के विरोध में पोस्टर लगाए। इसके बाद उनको टीआईसी के कार्यकारी के रूप में चुना गया था और इसके पूर्णकालिक आयोजक के रूप में भी कार्य किया।
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मूला को कई बार गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया और वह एक पुलिस स्टेशन से भाग गए, जहां उन्हें एकांत कारावास में रखा जा रहा था। दक्षिण अफ्रीका को अवैध रूप से छोड़कर, मूला दार-एस-सलाम में अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (एएनसी) के अन्य निर्वासित नेताओं में शामिल हो गए।
मूला अपनी पत्नी ज़ुबैदा और उनके बच्चों, तस्नीम और आजाद से कई वर्षों तक अलग रहे, क्योंकि उन्हें 1968 तक रंगभेदी अधिकारियों द्वारा दक्षिण अफ्रीका छोड़ने के लिए बार-बार पासपोर्ट देने से मना कर दिया गया था। वही मूला को सैन्य प्रशिक्षण के लिए सोवियत संघ में ओडेसा भेजा गया, जिसके बाद उन्होंने छह महीने मास्को में खुफिया प्रशिक्षण की ट्रेनिंग ली।
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1994 में मंडेला के दक्षिण अफ्रीका के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले राष्ट्रपति बनने के बाद, उन्होंने 1999 तक मूला को इस्लामिक गणराज्य ईरान में दक्षिण अफ्रीकी राजदूत के रूप में नियुक्त किया। जून 2000 के मध्य से 2004 तक मूला ने पाकिस्तान में उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। 2013 में, मूला को दक्षिण अफ्रीका के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक, ऑर्डर ऑफ लुथुली इन सिल्वर प्राप्त हुआ।