ये है सरकार पलटने का इतिहास
लंबे संघर्ष के बाद उत्तराखंड की स्थापना नौ नवंबर 2000 को की गई थी। पहली गठित अंतरिम विधानसभा में नित्यानंद स्वामी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया था। बाद में यह जिम्मेदारी भगत सिंह कोश्यारी को दी गई थी। वर्ष 2002 में उत्तराखंड का पहला विधानसभा चुनाव हुआ। पहले चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली। उसे 70 सीटों वाली विधानसभा में 36 सीटें मिली थीं। उसके नेता नारायण दत्त तिवारी राज्य के पहले चुने हुए मुख्यमंत्री बने। वे अब तक अपना कार्यकाल पूरा करने वाले इकलौते मुख्यमंत्री हैं।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पलट गई। भाजपा को पूर्ण बहुमत से केवल एक सीट कम यानी 35 सीटें मिलीं। उसने उत्तराखंड क्रांति दल और निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बनाई। भुवन चंद्र खंडूरी राज्य के मुख्यमंत्री बने। पिछले चुनाव में सरकार बनाने वाली कांग्रेस को केवल 21 सीटें मिलीं और उसे विपक्ष में बैठना पड़ा। बसपा को आठ सीटें मिलना उत्तराखंड में पार्टी के लिए नई संभावना खोलने वाला था।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सत्ता एक बार फिर पलट गई। विपक्ष में रही कांग्रेस सबसे ज्यादा 32 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसने भी निर्दलीयों, बसपा और अन्य के साथ मिलकर सरकार बनाई और विजय बहुगुणा उसके मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस से केवल एक सीट कम यानी 31 सीट लाने वाली भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस को 14,36,042 या 33.79 फीसदी वोट मिले थे। वहीं भाजपा को 14,08,341 या 33.13 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में भी उत्तराखंड की सरकार बदलने का सिलसिला जारी रहा। इस बार यहां भाजपा को 57 सीटों पर रिकॉर्ड जीत हासिल हुई तो कांग्रेस को केवल 11 सीटों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में विशेष बात यह रही कि भाजपा ने 46.5 मत प्रतिशत पर पहुंच गई। तो पिछले चुनावों में राजनीति में एक नई आशा बनकर उभर रही बसपा का यहां से सफाया हो गया। हालांकि, बसपा ने इसके बाद भी सात प्रतिशत वोट हासिल कर अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं।