हाल में अमेरिका पर कई साइबर हमले हुए हैं। उनमें मई में कोलोनियल पाइपलाइन पर हुआ हमला भी शामिल है, जिससे अमेरिका के पूर्वी इलाकों में कई दिनों तक गैस सप्लाई रुकी रही थी। उसके पहले फरवरी में फ्लोरिडा राज्य के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पर साइबर हमला हुआ था। उस हमले के जरिए पानी में जहरीले केमिकल्स की मात्रा काफी बढ़ा दी गई। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन हमलों ने अमेरिका में चिंता काफी बढ़ा दी है। उनसे ये जाहिर हुआ है कि ऐसे हमलों से किस हद तक नुकसान पहुंच सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका गृह मंत्रालय प्राइवेट कंपनियों के साथ मिल कर साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश में है। पेंटागन (रक्षा मंत्रालय) के अधिकारी रक्षा से जुड़े उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं। इन अधिकारियों ने कहा है कि साइबर क्षेत्र भविष्य में युद्ध का नया मोर्चा होगा। विश्लेषकों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय का ध्यान हाल तक परंपरागत युद्ध पर ही केंद्रित रहा। लेकिन साइबर सुरक्षा अब उसकी एक बड़ी चिंता बन गई है।
अमेरिका के साइबर सुरक्षा अधिकारियों की पहली चिंता रूस रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के साइबर सिक्युरिटी निदेशालय के प्रमुख रॉब जॉयस ने पिछले हफ्ते एक कांफ्रेंस में कहा कि अमेरिका महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को अस्त-व्यस्त करने की रूसी कोशिशों से अमेरिकी अधिकारी लंबे समय से चिंतित हैं। उन्होंने कहा- ‘हमने दुनिया भर में रूसी हैकरों की ऐसी कोशिशें देखी हैं। अमेरिका के अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ उनकी ऐसी तैयारियों के हमारे पास सबूत हैं।’ जॉयस ने कहा कि ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और अमेरिका को उनका मुकाबला करना होगा।