लीबिया में 2014 के बाद से अमेरिकी दूतावास नहीं है। अमेरिका ने अपने लीबियाई मिशन को ट्यूनिशिया में बना रखा है। यानी लीबिया के लिए नियुक्त अमेरिकी राजदूत ट्यूनिशिया में रहते हैं। लेकिन वहां राजदूत रह चुके पीटर बोडे ने एनबीसी से बातचीत में कहा कि अकसर लीबियाई अधिकारियों से संपर्क के लिए उनके साथ ट्यूनिशिया या किसी तीसरे देश में बैठक तय करनी पड़ती थी।
जो बाइडन प्रशासन ने यह साफ नहीं किया है कि उसका कतर स्थित अफगान मिशन कैसे काम करेगा। यह मिशन दोहा स्थित अमेरिका के कतर दूतावास से काम करेगा या उसे अल-उदीद वायु सेना अड्डे में स्थापित किया जाएगा। अल-उदीद पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैनिक अड्डा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने इस हफ्ते कहा कि फिलहाल दोहा स्थित अमेरिकी ऑफिस से ही अफगान दूतावास के काम को अंजाम दिया जाएगा। उस दफ्तर का अब एक प्रमुख काम तालिबान प्रतिनिधियों के साथ संपर्क बनाए रखना होगा।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि काबुल में अब अमेरिकी प्रतिनिधि की उपस्थिति होगी या नहीं, इस बारे में अमेरिका ने अब तक कुछ साफ नहीं कहा है। ऐसे में मुमकिन है कि कुछ राजनयिकों को छोटी अवधि के लिए वहां भेजा जाए। अमेरिका ऐसा पहले सोमालिया में कर चुका है। लेकिन वहां 2016 में राजदूत रहे स्टीफन स्वार्ट्ज ने एनसीबी से कहा- ‘ऐसा करना आसान नहीं होता है। लोगों का कहीं जाना और तुरंत वापस आना थकाने वाला होता है। साथ ही वह उतना प्रभावशाली भी साबित नहीं होता है।’