पिछले साल मार्च में काबुल में सिखों पर हुए आतंकी हमले के लिए दोषी माने जाने वाले हक्कानी नेटवर्क ने अल-कायदा के साथ नई इकाई बनाने के लिए चर्चा की है। यह दावा अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने किया है। आतंकी वित्तपोषण और धनशोधन को रोकने के लिए अपने कार्यों की समीक्षा में ट्रेजरी विभाग ने पिछले साल फरवरी में समझौते के बावजूद अफगान तालिबान के अल-कायदा से बने करीबी संपर्कों की जानकारी भी उपलब्ध कराई।
यूएस ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के पूर्व प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस एजेंसी (आईएसआई) का हाथ बताया था। हक्कानी नेटवर्क को लश्कर-ए-तैयबा के साथ पिछले साल काबुल में सिखों के तीर्थस्थल पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। इस हमले में करीब 30 लोग मारे गए थे। हक्कानी नेटवर्क को अक्सर अफगानिस्तान में भारतीय हितों को निशाना बनाने का आरोप लगता रहा है।
ट्रेजरी विभाग ने पेंटागन को एक दस्तावेज में जानकारी दी कि हक्कानी नेटवर्क के शीर्ष नेतृत्व ने सशस्त्र लड़ाकों की एक नई संयुक्त इकाई तैयार करने पर चर्चा की है। इस इकाई को अल-कायदा के सहयोग से तैयार किया जाएगा। चार जनवरी की तारीख वाले इस दस्तावेज में और जानकारी नहीं दी गई है।
कुछ रिपोर्ट्स ये भी दावा करती हैं कि सिखों पर हुआ हमला इसलिए किया गया था क्योंकि आतंकवादी काबुल में स्थित भारतीय दूतावास को निशाना बनाने में नाकाम रहे थे। दस्तावेज के अनुसार हक्कानी नेटवर्क मूल रूप से पाकिस्तान के वजीरिस्तान का है और यह पूर्वी अफगानिस्तान और काबुल में क्रॉस बॉर्डर गतिविधियों को अंजाम देता है।
पिछले साल मई में अफगान सुरक्षा बलों ने सिखों पर हुए हमले में शामिल एक नेटवर्क के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया था। यह नेटवर्क हक्कानी और इस्लामिक स्टेट की संयुक्त इकाई थी।
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान की सुरक्षा एजेंसी के राष्ट्रीय निदेशक कह चुके हैं कि यह संगठन शिया हाजरा अल्पसंख्यकों की भीड़ पर हमले और राष्ट्रपति अशरफ गनी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में रॉकेट हमले के लिए भी जिम्मेदार है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने यह भी कहा कि पिछले साल के दौरान अलकायदा अफगानिस्तान में अपनी ताकत बढ़ा रहा था। इसके साथ ही वह तालिबान की सुरक्षा में उसके साथ मिलकर गतिविधियां जारी रखे हुए था।