अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को निचली अदालत के उस आदेश को हटा दिया, जिसमें युद्धकालीन कानून का इस्तेमाल करके वेनेजुएला प्रवासियों के निर्वासन पर रोक लगाई गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि 1978 के विदेशी शत्रु अधिनियम के तहत निर्वासन के अधीन प्रवासियों को अपने निष्कासन को कानून रूप से चुनौती देने का मौका दिया जाना चाहिए।
एक संघीय अदालत के न्यायाधीश ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्वासन वाले फैसले पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वह अब फिर से निर्वासन शुरू कर सकते हैं। शीर्ष कोर्ट का 5-4 का फैसला उन्हें ऐसा करने के लिए फिर से अनुमति देता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कानून का उपयोग कथित वेनेजुएला गिरोह को सदस्यों को पकड़ने और उन्हें अल साल्वाडोर की जेल में भेजने के लिए किया था।
वकीलों ने कहा- उनके क्लाइंट को टैटू के आधार पर निशाना बनाया
अमेरिका से निर्वासित किए गए वेनेजुएलावासियों के वकीलों ने कहा कि उनके क्लाइंट वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डी अरागुआ के सदस्य नहीं थे, उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। लेकिन उन्हें मुख्य रूप से उनके टैटू के आधार पर निशाना बनाया गया।
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ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका में कानून के शासन को बनाए रखने में मदद करेगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने देश में कानून के शासन को बरकरार रखा है। इससे सीमाओं को सुरक्षित रखने और देश की रक्षा करने में मदद मिलेगी। यह अमेरिका में न्याय के लिए एक महान दिन है।'
15 मार्च को निचली अदालत ने निर्वासन पर लगाई थी रोक
बता दें कि अमेरिकी जिला न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने 15 मार्च को युद्धकालीन कानून के तहत वेनेजुएला के प्रवासियों को अल साल्वाडोर भेजे जाने के बाद निर्वासित लोगों की अगली उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस रोक को हटा दिया।
इस मामले की सुनवाई टेक्सास में होनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई टेक्सास में होनी चाहिए, न कि वाशिंगटन में। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि जिन वेनेजुएला के प्रवासियों को निर्वासित किया गया है, वह टेक्सास में हैं और उन्होंने अपने निष्कासन का मुकदमा वाशिंगटन में दायर किया था।
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निर्वासन का सामना करने वाले प्रवासियों को उचित प्रक्रिया का हक
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि जिन प्रवासियों को AEA के तहत निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें उचित प्रक्रिया का हक है। क्योंकि, इस कानून का उपयोग केवल 1812 के युद्ध, प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया था।
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