अमेरिकी सरकार की रक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) ने कहा कि अभी सौदे में मोलभाव के विकल्प खुले हुए हैं। भारत को मंजूरी पत्र दिए जाने के बाद कीमत पर दोबारा बातचीत होगी। डीएससीए ने कहा कि प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगी। एजेंसी ने भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति बताया।
कांग्रेस ने सौदे पर खड़े किए सवाल
इससे पहले, कांग्रेस ने फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे की ही तरह भारत और अमेरिका के बीच प्रीडेटर ड्रोन सौदे पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बुधवार को आरोप लगाया था कि अमेरिका ने दूसरे देशों को यही ड्रोन बहुत कम कीमत पर बेचा है। भारत को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी प्रीडेटर ड्रोन सौदे में पूर्ण पारदर्शिता की मांग करती है।
विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब
वहीं, इस सौदे पर एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे का संबंध अमेरिकी पक्ष से है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, अमेरिका ड्रोन सौदे को अंतिम रूप देने से पहले अपने देश से जुड़े तमाम आंतरिक पहलुओं पर मंथन कर रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन सौदा मामले में भारत अमेरिकी रूख का सम्मान करता है।