अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है। देश के 50 राज्यों के मतदाता मतदान के जरिए अगले चार साल के लिए राष्ट्रपति चुनेंगे। 5 नवंबर (मंगलवार) को होने वाले चुनाव में मतदाता अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों के लिए भी मतदान करेंगे। कांग्रेस सदस्य कानूनों को पारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह मुकाबला मौजूदा उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच होना है।
आइये जानते हैं कि अमेरिका में आम चुनाव कब है? यहां की चुनाव प्रणाली कैसे काम करती है? कौन चुनाव लड़ रहा है? वोट कैसे डाले जाते हैं? और इलेक्टोरल कॉलेज क्या है? साथ ही, वोटों की गिनती कैसे होती है और नतीजे कब आएंगे?
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव कब है?
मंगलवार 5 नवंबर 2024 को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव है। इस चुनाव में जीतने वाला व्यक्ति व्हाइट हाउस से देश का नेतृत्व करेगा। राष्ट्रपति का कार्यकाल जनवरी 2025 से शुरू होकर चार साल चलेगा। राष्ट्रपति के पास कुछ कानून स्वयं पारित करने की शक्ति है, लेकिन अधिकांशतः उन्हें कानून पारित करने के लिए संसद (कांग्रेस) के साथ मिलकर काम करना पड़ता है।
डोनाल्ड ट्रंप, कमला हैरिस
- फोटो : Amar Ujala
उम्मीदवार कौन हैं और उन्हें कैसे चुना जाता है?
दोनों मुख्य पार्टियों रिपब्लिकन और डेमोक्रटिक पार्टी में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चयन राज्यों की प्राइमरी और कॉकस सभाओं में किया जाता है। प्राइमरी और कॉकस दो ऐसे तरीके हैं जिनसे लोग राज्यों और राजनीतिक दलों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुनने में मदद करते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी बढ़त के साथ अपनी पार्टी का समर्थन हासिल किया। मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन में एक पार्टी सम्मेलन में वे आधिकारिक रिपब्लिकन उम्मीदवार बन गए। ट्रंप ने ओहियो के सीनेटर (उच्च सदन के सदस्य) जेडी वेंस को अपना उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना।
दूसरी ओर डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति जो बाइडन के बाहर होने के बाद उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को पार्टी का चेहरा चुना। अगस्त के आरंभ में कमला को आधिकारिक तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया गया और उन्होंने तुरंत ही अभियान शुरू कर दिया। उनके उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज हैं।
जहां 2020 के चुनाव में जो बाइडन के निर्वाचित होने के बाद से हैरिस उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रही हैं तो वहीं ट्रंप तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं, उन्होंने 2016 में अपना पहला चुनाव जीता था और चार साल बाद 2020 में बाइडन से हार गए थे।
राष्ट्रपति पद के लिए कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर का था, जो पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे हैं। कैनेडी जूनियर ने अगस्त के अंत में अपना अभियान स्थगित कर दिया और ट्रंप को समर्थन दे दिया।
राष्ट्रपति के अलावा अमेरिकी और किसके लिए मतदान करेंगे?
वे उपराष्ट्रपति के लिए भी मतदान करेंगे, लेकिन यह वोट राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले वोट से जुड़ा हुआ है। इसका मलतब है कि ट्रंप के लिए वोट उनके सहयोगी जेडी वेंस के लिए वोट होगा और कमला हैरिस के लिए वोट उनके सहयोगी टिम वाल्ज के लिए भी वोट होगा।
मतदाता संसद यानी कांग्रेस के नए सदस्यों का भी चुनाव करेंगे। दरअसल, कांग्रेस अमेरिकी सरकार की विधायी शाखा है जिसके दो भाग हैं - प्रतिनिधि सभा और सीनेट। प्रतिनिधि सभा और सीनेट को हम भारत में लोकसभा और राज्यसभा से समझ सकते हैं। हर राज्य में दो सीनेटर और कम से कम एक प्रतिनिधि होते हैं। प्रतिनिधि सभा यानी निचले सदन की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जबकि 33 सीनेट सीटों पर भी नवंबर में फैसला होगा।
डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव में मतदान कौन कर सकता है?
18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी अमेरिकी नागरिक चुनाव में मतदान कर सकते हैं। कुछ राज्यों में अपवाद भी हैं जो कुछ मतदाताओं को चुनाव में हिस्सा लेने से रोकते हैं। कुछ लोग किसी घोर अपराध (एक गंभीर अपराध जिसके लिए एक वर्ष से अधिक कारावास की सजा हो सकती है) के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद या यदि वे वर्तमान में किसी छोटे अपराध के लिए जेल में सजा काट रहे हैं, तो वे मतदान नहीं कर सकते हैं। कुछ राज्यों में मानसिक दिव्यांगता वाले कुछ लोग मतदान करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बहस
- फोटो : अमर उजाला
निर्वाचक मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज क्या है?
अमेरिकी लोग वास्तव में सीधे तौर पर वोट नहीं देते कि वे किसे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। इसके बजाय वे निर्वाचकों (निर्वाचक मंडल के सदस्यों) के लिए वोट करते हैं, जो राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पदों के लिए उनके द्वारा चुने गए उम्मीदवार का समर्थन करते हैं। पूरे अमेरिका में कुल 538 निर्वाचक हैं। इनमें से कांग्रेस के हर सदस्य के लिए एक और कोलंबिया जिले से तीन अतिरिक्त निर्वाचक होते हैं।
अमेरिका के 50 राज्यों में से सभी की जनसंख्या के आधार पर निर्वाचकों की संख्या तय होती है।उदाहरण के तौर पर कैलिफोर्निया राज्य को देखें तो इसकी जनसंख्या लगभग 4 करोड़ है और इसके पास इलेक्टोरल कॉलेज में 54 वोट हैं। वहीं नॉर्थ डकोटा की जनसंख्या लगभग 7.62 लाख है और इसके पास सिर्फ तीन वोट हैं।
अधिकांश राज्यों में विनर-टेक-ऑल सिस्टम लागू होता है, इसलिए यदि कोई किसी राज्य में सबसे अधिक वोट जीतता है, तो उसे निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) के सभी वोट मिल जाते हैं।
कैलिफोर्निया का ही उदाहरण लें तो 4 करोड़ की आबादी वाले राज्य में 2020 के चुनाव में लगभग 1.71 करोड़ लोगों ने वोट डाले थे। इनमें से बाइडन के लिए 11,110,250 वोट और ट्रंप के लिए 6,006,429 वोट डाले गए थे। ऐसे मतदान का मतलब है कि कैलिफोर्निया के इलेक्टोरल वोट बाइडन को गए।
चार इलेक्टर वाले मेन और पांच इलेक्टर वाले नेब्रास्का दो ऐसे राज्य हैं जो अपने इलेक्टोरल वोटों को इस आधार पर बांटते हैं कि हर उम्मीदवार को कितने सार्वजनिक वोट मिलते हैं। हम इसे नेब्रास्का के 2020 के परिणामों से समझ सकते हैं। पिछले चुनाव में राज्य के लोगों ने ट्रंप को 5,56,846 वोट और बाइडन को 3,74,583 वोट दिए। नेब्रास्का के पास पांच इलेक्टोरल वोट हैं, इसलिए ज्यादातर दूसरे राज्यों में ट्रंप को सभी पांच इलेक्टोरल वोट मिल जाते। लेकिन चूंकि नेब्रास्का में वोटों का बंटवारा है, इसलिए चार इलेक्टोरल वोट ट्रंप को और एक बाइडन को मिला।
270 इलेक्टोरल कॉलेज वोट पाने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति पद जीतता है। पिछले चुनाव में जीतने वाले बाइडन को 306 वोट मिले थे जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ट्रंप को 232 मत मिले थे।
अगर किसी भी प्रत्याशी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो प्रतिनिधि सभा राष्ट्रपति का चुनाव कंटिंजेंट इलेक्शन के जरिए करती है। इसमें प्रतिनिधि तीन शीर्ष उम्मीदवारों के आधार पर राष्ट्रपति के लिए वोट करते हैं। लेकिन अमेरिका के पूरे इतिहास में ऐसा केवल तीन बार हुआ है और पिछली बार ऐसा होने के बाद से 200 साल से ज्यादा हो गए हैं।
कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : X / @KamalaHarris
स्विंग स्टेट्स क्या होते हैं?
यह एक ऐसा शब्द है जिसकी चुनाव के दौरान खूब चर्चा होती है। अधिकांश राज्यों के लोग किसी एक पार्टी को ही पसंद करते हैं और उनकी यह अमूमन चुनाव-दर-चुनाव एक जैसी रहती है। उदाहरण के लिए व्योमिंग में लोगों ने 1968 से केवल रिपब्लिकन को ही वोट दिया है। मैसाचुसेट्स के निवासियों ने 1932 से चार चुनावों को छोड़कर सभी चुनावों में डेमोक्रेट को ही वोट दिया है।
लेकिन स्विंग स्टेट्स, राष्ट्रपति चुनावों में अलग-अलग दलों को अपनी पसंद के रूप में चुनते हैं। इन्हें बैटलग्राउंड या टॉस-अप स्टेट्स के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि वे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच मतदान करते रहते हैं।
महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव प्रचार में पार्टियां लाखों डॉलर खर्च करती हैं, क्योंकि अतिरिक्त कॉलेज वोट जीतना अहम हो सकता है। 2024 में अहम राज्यों में एरिजोना, जॉर्जिया, मिशिगन, नेवादा, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन स्विंग स्टेट्स हो सकते हैं।
मतदान कैसे होता है?
अमेरिका में लोग मतपत्रों पर मतदान करते हैं और अधिकांश लोग अपने स्थानीय मतदान केंद्र पर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से मतदान करते हैं। मतदाता तीन तरीके से मतदान करते हैं। इसमें पहला तरीका हाथ से चिह्नित कागज के मतपत्र का है। ज्यादातर लोग अपने मतपत्र पर कलम से निशान लगाते हुए अपनी पसंद को चुनते हैं।
दूसरा तरीका बैलेट मार्किंग डिवाइस का है। ये ऐसी मशीनें हैं जिसमें मतदाता इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपना वोट करते हैं और कागज के रूप में यह रिकॉर्ड होता है। चुनाव से जुड़ी संस्था वेरिफाइड वोटिंग का कहना है कि लगभग एक चौथाई लोग इन मशीनों से मतदान करते हैं।
तीसरा तरीका इलेक्ट्रॉनिक मशीनों का है। लगभग 7% मतदाता ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां डायरेक्ट रिकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक (डीआरई) मशीनों का इस्तेमाल होता है। डीआरई ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो मतों को मेमोरी में सेव करते हैं, आमतौर पर किसी कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती।
अधिकांश राज्यों में डाक के जरिए मतदान की अनुमति है, या लोग अपने स्थानीय चुनाव कार्यालय में अपना मतपत्र पहले ही जमा करा सकते हैं। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है या उन अमेरिकी नागरिकों के लिए है जो विदेश में हैं या सेना में सेवारत हैं।
मतपत्र में क्या होता है?
मतपत्र राज्य दर राज्य अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमेशा राष्ट्रपति पद का सेक्शन होता है, जहां मतदाता यह चिन्हित करता है कि वह किस राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को जिताना चाहता है। इसके अलावा एक सेक्शन ऐसा भी होता है जहां लोग सीनेटरों और प्रतिनिधियों के लिए वोट करते हैं।
मतदाता जिस भी उम्मीदवार को वोट देना चाहते हैं उसके बगल वाले बॉक्स पर निशान लगाकर अपना चुनाव करते हैं।
वोटों की गिनती कैसे होती है और नतीजे कब आएंगे?
अधिकांश राज्यों में इनकी गिनती इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर द्वारा की जाती है। हालांकि, कभी-कभी मतों को हाथ से भी गिना जाता है। अनुमानित विजेता की घोषणा आमतौर पर चुनाव की रात को की जाती है। हालांकि, वास्तविक निर्वाचक मंडल का मतदान दिसंबर में होता है। जब तक इलेक्ट्रोरल वोट आधिकारिक रूप से नहीं डाले जाते, तब तक राष्ट्रपति वास्तव में निर्वाचित नहीं होता।
शपथ ग्रहण कब होगा?
जनवरी की शुरुआत में अमेरिकी संसद 'कांग्रेस' का इलेक्ट्रोरल वोटों की गिनती के लिए एक संयुक्त सत्र होता है। उपराष्ट्रपति गिनती की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं और घोषणा करते हैं कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के रूप में किसे चुना गया है। इस मामले में कमला हैरिस गिनती की अध्यक्षता करेंगी।
विजेताओं को जनवरी में उनके शपथग्रहण तक निर्वाचित राष्ट्रपति और निर्वाचित उप-राष्ट्रपति कहा जाता है। शपथ ग्रहण समारोह में ही दोनों पद की शपथ लेते हैं और अपना चार वर्षीय कार्यकाल शुरू करने के लिए व्हाइट हाउस में प्रवेश करते हैं।