अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने सोमवार को सर्वसम्मति से तिब्बती नीति और सहायता अधिनियम (टीपीएसए) 2020 पारित कर दलाईलामा उत्तराधिकारी मामले में दखल देने पर चीनी अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंधों का रास्ता साफ कर दिया। ट्रेड वार समेत दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच यह अधिनियम अमेरिका-चीन रिश्तों में आग में घी डालने का काम करेगा।
फरवरी में अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में तिब्बत की संप्रभुता को मान्यता देते हुए बिल पारित किया था। इस बिल के माध्यम से चीन के उन इरादों पर भी पानी फिर गया है, जिसमें वह दलाई लामा का अगला उत्तराधिकारी चुनने में अपना दखल देने का प्रयास कर रहा था। अमेरिका ने इस बिल के माध्यम से तिब्बत की स्वायत्तता को मान्यता दी है। अब दलाई लामा के किसी भी मामले में चीन का हस्तक्षेप स्वतंत्रता में दखल माना जाएगा।
सीटीए के अध्यक्ष बोले, ऐतिहासिक क्षण
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के अध्यक्ष लोबसांग सांगे ने इसे ऐतिहासिक निर्णय करार दिया। उन्होंने कहा, टीपीएसए इस बात को आधिकारिक बनाता है कि अमेरिकी नीति दलाई लामा के उत्तराधिकारी के संबंध में निर्णय मौजूदा दलाई लामा के प्रशासन को देता है। अमेरिकी कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अमेरिका के लिए तिब्बत बड़ी प्राथमिकता है और वह दलाई लामा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।
चीन तिलमिलाया, कहा-आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
अमेरिका के इस कदम से चीन तिलमिला गया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को कहा, आंतरिक मामलों में अमेरिका का दखल चीन बर्दाश्त नहीं करेगा। हम आग्रह करते हैं कि ऐसा कानून बनने से रोका जाए। इससे आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचेगा। इस बीच, चीनी अधिकारियों पर अमेरिका द्वारा नए वीजा प्रतिबंधों की घोषणा करने के बाद चीन ने भी मंगलवार को अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ ऐसे ही कदम उठाए।
चीन के वीजा संबंधी इस कदम से पहले अमेरिका के विदेश विभाग ने सोमवार को घोषणा की थी कि अमेरिका चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के उन अधिकारियों को वीजा नहीं देगा जिनकी नीतियां एवं कार्यक्रमों का लक्ष्य धार्मिक समूहों, जातीय अल्पसंख्यकों का दमन करना है। वेनबिन ने कहा, चीन ने उन अमेरिकियों और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ जवाबी कदम उठाए हैं, जो चीन के अंदरूनी मामलों में हाल के दखल के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं।