भले ही ईरान और इस्राइल के बीच युद्धविराम हो गया हो, लेकिन अमेरिका पर अभी भी ईरानी साइबर हमलों का खतरा मंडरा रहा है। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) और संघीय साइबर सुरक्षा अधिकारियों ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को ईरान का समर्थन करने वाले हैकिंग समूहों से सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
एक सार्वजनिक बुलेटिन में, अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ईरान से संबद्ध और उसका समर्थन करने वाले हैकिंग समूह अभी भी अमेरिका पर साइबर हमला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हैकिंग समूह अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे- बिजली, परिवहन और व्यापारिक केंद्रों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
हैकरों के निशाने पर हो सकती हैं रक्षा और इस्राइल से जुड़ी अमेरिकी कंपनियां
एजेंसियों ने यह भी कहा कि रक्षा से जुड़ी कंपनियां और इस्राइल से जुड़ी अन्य अमेरिकी कंपनियां भी हैकरों के निशाने पर हो सकती हैं। एजेंसियों ने चेतावनी दी, 'भले ही युद्धविराम घोषित हो चुका है और शांति की बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान से जुड़े हैकर अब भी इंटरनेट के जरिये नुकसान पहुंचा सकते हैं।'
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इंटरनेट पर छिपे साइबर हमलों को रोकना होता है मुश्किल
ईरान और इस्राइल के बीच युद्धविराम के बाद भी साइबर खतरों की यह चेतावनी इसलिए भी अहम है, क्योंकि इंटरनेट पर होने वाले साइबर हमले अक्सर छिपे होते हैं और इन्हें रोकना मुश्किल होता है। कई बार ये हैकर किसी सरकार के लिए काम करते हैं, और वे पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के विकल्प के रूप में जवाबी कार्रवाई करना चाह सकते हैं। हालांकि, कभी-कभी हैकिंग समूह अपने मन से भी साइबर हमला कर सकते हैं।
सॉफ्टवेयर अपडेट करने और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने की सलाह
बुलेटिन में सलाह दी गई है कि कंपनियां और लोग अपने सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए नियमित तौर पर सॉफ्टवेयर अपडेट करें और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें। ईरान का समर्थन करने वाले हैकरों ने पहले भी अमेरिका की बैंकों, रक्षा कंपनियों और ऊर्जा कंपनियों पर हमले किए हैं, खासकर तब जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। हालांकि, अभी तक हैकरों ने कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाया है।
ईरान के पास चीन-रूस जितनी तकनीकी क्षमताएं नहीं
हालांकि, चीन या रूस जितनी तकनीकी क्षमताएं ईरान के पास नहीं हैं, फिर भी वह अपने सीमित साधनों से जानकारी चुराने, राजनीतिक फायदा उठाने या दुश्मनों को डराने की कोशिश करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये हैकर ईरान की सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए काम करते हैं। लेकिन कुछ हैकर ऐसे भी हैं जो स्वतंत्र रूप से हमला करते हैं।
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ईरान-इस्राइल के बीच 13 जून को शुरू हुआ था युद्ध
गौरतलब है कि ईरान और इस्राइल के बीच 13 जून को युद्ध तब शुरू हुआ जब इस्राइल ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने भी ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 के तहत इस्राइल के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इस बीच, दोनों के युद्ध में अमेरिका ने भी एंट्री ली और ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर बंकर बस्टर बमों से हमला किया। बाद में, ईरान ने भी इराक में अमेरिका के एयरबेस पर हमला किया। जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा की।
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