अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए जितने भी प्रयास हुए हैं, उन सबमें पाकिस्तान शामिल रहा है। इस बीच, वह तालिबान लड़ाकों का समर्थन भी करता रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तानी फौज के अधिकारी भी समर्थन करने में पीछे नहीं हैं।
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बीच तालिबान का बढ़ता कब्जा न केवल अफगानी सरकार के लिए चिंता का विषय है, बल्कि दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष इसे रोकने के लिए रणनीति बनाने का विचार कर रहे हैं। इसी बीच व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने अपने समकक्ष पाकिस्तानी एनएसए से मुलाकात कर हालात पर चिंता जताई। जेक सुलिवन ने बताया कि वह पाकिस्तानी एनएसए से मिलकर क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की है। साथ ही अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमतों को खत्म करने और हिंसा कम करने के लोकर राजनीतिक समाधान पर विस्तार से चर्चा की है।
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तालिबान को पाकिस्तान कर रहा समर्थन
बता दें कि अफगानिस्तान में शांति स्थापना के लिए जितने भी प्रयास हुए हैं, सभी में पाकिस्तान मौजूद रहा है। इतना ही नहीं वह तालिबान लड़ाकों का समर्थन भी करता रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी भी इन हमलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी फौज के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी भी उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं ।
बीते दिनों तालिबान ने हेरात में सलमा डैम पर हमला किया था। इसे आधिकारिक तौर पर 'अफगान-भारत फ्रेंडशिप डैम' कहा जाता है। इस डैम के लिए पैसा भारत ने लगाया था। इससे अभी 42 मेगावॉट बिजली पैदा होती है। पाकिस्तान को यह अच्छा नहीं लगता कि भारत और अफगानिस्तान के बीच दोस्ती बनी रहे। इस हमले को इसी संदर्भ में देखना की जरूरत है।
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लौट रहा तालिबानी राज
वहीं राष्ट्रपति जो बाइडेन की घोषणा के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी शुरू हो चुकी है। सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान में तालिबानी राज फिर से लौटने लगा है।