विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को लिखे पत्र में सांसदों ने विदेश मंत्रालय से यह आकलन करने का अनुरोध किया कि क्या अमेरिकी मूल की सुरक्षा सहायता ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को बढ़ावा दिया है। पत्र लिखने वालों में कांग्रेस सदस्य इल्हान उमर भी शामिल हैं, जो अमेरिकी कांग्रेस में मुस्लिम हितों के समर्थकों में से एक हैं।
पत्र में उन्होंने कहा, हम अनुरोध करते हैं कि भविष्य की सुरक्षा सहायता को तब तक रोक दिया जाए जब तक कि पाकिस्तान संवैधानिक व्यवस्था की बहाली की दिशा में निर्णायक रूप से आगे नहीं बढ़ जाता, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना शामिल है।
डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, ईशनिंदा कानून को और मजबूत करने के पाकिस्तान के कदमों को भी पत्र में प्रमुखता से उठाया गया है, जिसमें विदेश मंत्री ब्लिंकन को चेतावनी दी गई है कि प्रस्तावित परिवर्तनों का इस्तेमाल छोटे धार्मिक समूहों और अल्पसंख्यकों पर शिकंजा कसने के लिए किया जाएगा।
पाकिस्तान में संवैधानिक व्यवस्था बहाल करने और ईशनिंदा कानून में बदलाव को वापस लेने की मांग करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने कहा, 'हम आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2023 के पारित होने को लेकर बेहद चिंतित हैं जो मौजूदा ईशनिंदा कानून को मजबूत करेगा, जिसका इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए किया जाता रहा है।'
पत्र में अमेरिकी सांसदों ने कहा कि विधेयक, जिस पर राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा हस्ताक्षर किए जाने बाकी हैं, कई सांसदों द्वारा पूरी तरह से संसदीय प्रक्रिया के लिए बार-बार आह्वान किए जाने के बावजूद जल्दबाजी में पारित किया गया।