अमेरिका-भारत व्यापार समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में भी प्रगति का रास्ता खुलेगा, जहां दशकों से उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी है। अमेरिका के विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही है। अधिकारी ने कहा कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देश लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच चुके हैं और कुछ अंतिम मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
पीटीआई के इस सवाल के जवाब में कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर कब हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, अधिकारी ने कहा, “मैं कहूंगा कि इंतजार कीजिए, जैसा कि हम लगातार कहते रहे हैं। लेकिन हम बहुत करीब हैं। यह 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है और बस कुछ अंतिम चीजों पर काम किया जा रहा है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि आप बहुत जल्द इस पर कुछ देखेंगे।”
अमेरिकी अधिकारी ने व्यापार के मुद्दे को क्यों बताया अड़चन?
उन्होंने कहा, “और यह वास्तव में अमेरिका-भारत संबंधों को एक और स्तर पर ले जाएगा। व्यापार के मामले में ऐसा स्तर हासिल नहीं हो सका है, जिस तक हम दशकों से पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।” अधिकारी ने कहा कि व्यापार हमेशा दोनों देशों के संबंधों में सबसे बड़ा अड़चन वाला मुद्दा रहा है। उन्होंने कहा, “इसलिए मुझे लगता है कि हम बहुत करीब हैं और जब हम वहां पहुंचेंगे तो यह बहुत, बहुत उत्साहजनक होगा।”
अक्टूबर में विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा को लेकर पूछे गए एक अन्य सवाल पर अधिकारी ने कहा, “यह अमेरिका-भारत साझेदारी के लगातार विस्तार और उस पर दिए जा रहे ध्यान का हिस्सा है। बहुत कुछ हो रहा है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में अमेरिका द्वारा फ्लोरिडा में आयोजित किए जाने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिका जाने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में कुछ बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं।
क्वाड की बैठक को लेकर कया बोला अमेरिका?
उन्होंने कहा, “संबंधों में बहुत कुछ हो रहा है।” अधिकारी ने कहा कि इस साल क्वाड से जुड़े मुद्दों पर विदेश मंत्रियों की बैठक तीसरी बार होगी। उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व है। वे इससे पहले इतनी बार कभी नहीं मिले हैं। और मुझे लगता है कि इससे पता चलता है कि हम इस कूटनीतिक समूह को कितना महत्व दे रहे हैं। भारत भी इसे महत्व देता है, जैसा कि जापान और ऑस्ट्रेलिया करते हैं। इसलिए इस पर भी नजर बनाए रखें।”
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक मई में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। अधिकारी ने कहा, “मुझे लगता है कि अगले महीने के अंत में आपको इससे जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजें सामने आती हुई दिखाई देंगी।” भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी आईएमईसी के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, “यह अमेरिका और भारत दोनों की बिल्कुल बड़ी प्राथमिकता है।”
आईएमईसी को लेकर क्या है अमेरिका का रुख?
अधिकारी ने कहा कि मध्य पूर्व में हुए घटनाक्रमों के कारण इस गलियारे की दिशा में आगे बढ़ने में कई बाधाएं आईं, लेकिन क्षेत्र में स्थिरता आने पर इसे फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि भारत की ओर से और अमेरिका की ओर से हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आई कुछ चुनौतियों के कारण ऐसा नहीं हो सका। प्रशासन की शुरुआत में ही राष्ट्रपति के पद संभालने के समय हम इजरायल और गाजा से जुड़े मुद्दों से जूझ रहे थे। इससे निश्चित तौर पर काम रुक गया।”
उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद ईरान और ऑपरेशन मिडनाइट हैमर हुआ, जिससे भी काम रुक गया। इसलिए यह वास्तव में मध्य पूर्व में होने वाली घटनाओं से प्रभावित रहा है। जब हालात स्थिर होंगे, तब आप आईएमईसी को तेजी से आगे बढ़ते हुए देखेंगे।” अधिकारी ने कहा कि अमेरिका आईएमईसी को लेकर उत्साहित है और कुछ मार्गों की रूपरेखा तैयार करने पर पहले से काम चल रहा है। इनमें समुद्री और ट्रक परिवहन मार्ग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन मध्य पूर्व के देशों, सऊदी अरब, जॉर्डन, यूएई और इजरायल को अभी भी इस परियोजना में अपनी-अपनी भूमिका को लेकर चीजें तय करनी होंगी।”