ये आशंका ट्रंप के कुछ वक्त पहले दिए गए बयान और आज के बयान को देखकर मजबूत हो जाती है। ट्रंप ने सिंतबर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि हम चुनाव होते ही उसी रात अपने वकीलों के साथ तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव में फर्जीवाड़ा हो सकता है।
ट्रंप बोले, उच्चतम न्यायालय जाऊंगा
ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिकी जनता के साथ 'बड़ी धोखाधड़ी' की जा रही है और वह इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएंगे। ट्रंप ने दावा किया, ''हम यह चुनाव जीत चुके थे।करोड़ों लोगों ने हमें वोट दिया है।'' उन्होंने दावा किया कि बेहद निराश लोगों का एक समूह दूसरे समूह के लोगों को हतोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है। हम बड़े जश्न की तैयारी में थे। हम जीत रहे थे। लेकिन अचानक सब बदल दिया गया। राष्ट्रपति ने बिना कोई सबूत दिए कहा कि कोई 'बड़ी धोखाधड़ी' की गई है।
ट्रंप पोस्टल वोटिंग पर जताया था संदेह
इससे पहले, ट्रंप ईमेल या डाक के जरिए मतदान (मेल-इन-बैलेट) पर भी शक जता चुके हैं। वे लगातार इसके बारे में बारे में कहते रहे हैं कि इससे चुनाव में धांधली हो सकती है।
अब सवाल ये उठता है कि क्या हारी हुई पार्टी विजेता पार्टी को सत्ता देने से इनकार भी कर सकती है? इस बारे में द अटलांटिक में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संविधान सत्ता के शांतिपूर्वक हस्तांतरण की बात नहीं करता है, बल्कि वो इसका अनुमान लगा लेता है कि ऐसा ही होगा। ऐसे में अगर कोई राष्ट्रपति हार के बाद भी सत्ता जीती पार्टी को देने से इनकार कर दे, तो इसके लिए अमेरिकी संविधान में कोई अलग से प्रावधान नहीं बनाया गया है। ऐसे में ट्रंप के हार मानने से इनकार करने पर हालत भयावह हो सकते हैं। खासकर जब पहले से ही अमेरिका कोरोना संक्रमण से कमजोर पड़ा हुआ है।
न्यायालय अंतिम विकल्प
उनके बयान को संदर्भ मानते हुए फिलहाल कानून का ही विकल्प बचता है। यानी अगर चुनाव के बाद नतीजे आने पर ट्रंप ने किसी तरह से परेशानी खड़ी करने की कोशिश की, तो मामला न्यायालय में जाएगा। इसी वजह से राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार जो बिडेन भी वकीलों की पूरी फौज तैयार कर चुके हैं।