डोनाल्ड ट्रंप-जो बाइडेन (फाइल फोटो)
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अमेरिका में नंवबर में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं। हालांकि हर कोई बाइडेन या ट्रंप के पक्ष में मतदान करने का इच्छुक नहीं है। ऐसे में उनके लिए अन्य पार्टियों के उम्मीदवार जैसे कि कान्ये वेस्ट पसंद हो सकते हैं।
चुनाव में दो महीने से भी कम का वक्त बचा है और दोनों ही पार्टियां इसे अब तक का सबसे अहम चुनाव बता रही हैं। हाल के हफ्तों में पार्टी के उम्मीदवारों ने रिकॉर्ड ब्रेक भाषण भी दिए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक जहां लोगों की भागीदारी में उछाल की भविष्यवाणी कर रहे हैं वहीं बहुत से मतदाता अभी तक इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि उन्हें किसे वोट देना चाहिए।
ह्यूस्टन में रहने वाले 32 साल के साइकेट्रिक नर्स सामियान क्वेजी ने कहा, ‘मेरा इस चुनाव से मोहभंग हो रहा है। हमारे पास वास्तव में कोई अच्छा विकल्प नहीं है। न तो उम्मीदवार वास्तव में किसी मुद्दे पर बात कर रहे हैं और न ही देश को कोई उम्मीद दे रहे हैं जिससे लोगों का जीवन बेहतर हो सके।’
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अमेरिका में राजनीतिक भागीदारी न होने के कारण वहां दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले मतदाता दर कम हो रही है। हालिया चुनाव में 50-60 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। ओईसीडी देशों में कुल मतदाता दर लगभग 70 प्रतिशत है। यहां तक की कई विकासशील देशों में भी अमेरिका से ज्यादा मतदाता दर देखी गई है।
2008 में बराक ओबामा और जॉन मैकेन के बीच हुए चुनाव में मतदाता दर 68 प्रतिशत थी। हालांकि 2016 के चुनाव के दौरान यह दर 20 साल के निचले स्तर पर फिसलकर केवल 55 प्रतिशत रह गई।
ट्रंप और बाइडेन के अलावा ये उम्मीदवार भी हैं मैदान में
- जो जोरगेनसन- लिबरटारियन पार्टी
- होवी हॉकिन्स- ग्रीन पार्टी
- कान्ये वेस्ट- बर्थडे पार्टी
- रॉकी डे ले फ्यूंटे- अलायंस एंड रिफॉर्म पार्टीज
- डॉन ब्लैंकेनशिप- कॉस्टीट्यूशन पार्टी
वाम झुकाव वाले नाइट फाउंडेशन द्वारा फरवरी में जारी एक अध्ययन के अनुसार, गैर-लाभकारी मतदाताओं में से लगभग आधे या लगभग 100 मिलियन लगातार चुनाव से दूर रहते हैं। नाइट फाउंडेशन की रिपोर्ट पर अकादमिक सलाहकार एटन हर्श ने कहा, ‘यह एक बहुत बड़ा समूह है और यह देश का आधा हिस्सा है, इसलिए यह एक विविध समूह है। राजनीतिक जुड़ाव की कमी का संबंध उन लोगों से है जो चुनाव प्रक्रिया से खुद को जोड़तर नहीं रखते हैं।’