अमेरिका के प्रबंधन एवं संसाधन मामलों के उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा ने भारत और अमेरिका के बीच की साझेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत और अमेरिका के साझा दृष्टिकोण ने दोनों देशों को एक साथ ला दिया है। इसके अलावा, युद्ध के बाद की व्यवस्था और लोकतंत्र पर आधारित मानदंडों को मजबूत करने में मदद की है।
कार्यक्रम में लिया था भाग
अमेरिकी राजनयिक बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। बता दें, रिचर्ड वर्मा ने भारत में 25वें संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत के रूप में काम किया है। उन्हें साल 2014 की सितंबर में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नियुक्त किया था।
दोनों देश करीब आए
वर्मा ने कहा, 'हिंद- प्रशांत क्षेत्र के लिए हमारा साझा दृष्टिकोण दोनों देश को करीब लाया है। इस रिश्ते ने युद्ध के बाद की व्यवस्था, लोकतंत्र, कानून के शासन और विवादों के शांतिपूर्ण पर आधारित मानदंडों को मजबूत करने में मदद की है।'
नागरिकों को अधिक सशक्त बनाने में मदद की
उन्होंने आगे कहा कि क्वाड जैसी पहल ने सहयोग के ढांचे में अधिक निश्चितता लाई है। साथ ही नागरिकों को अधिक सशक्त और सुरक्षित बनाने में भी मदद की है। अमेरिकी राजनयिक ने कहा, 'सहयोग के लिए हमारी नई संरचनाएं, जिनमें से प्रमुख क्वाड है। क्वाड सहयोग के ढांचे में अधिक निश्चितता और स्पष्टता लाया है और वास्तव में भविष्य के लिए आशावाद की भावना पैदा की है। क्वाड एक नेता-स्तरीय संगठन के रूप में विकसित हुआ है जो हिंद-प्रशांत संरचना का एक नया स्तंभ बना रहा है।'
इसकी भी की सराहना
वर्मा ने कहा कि जब समान विचारधारा वाले देश क्वाड की तरह जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए अधिक शांति और समृद्धि, समुद्री सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक साथ आते हैं, तो हमारे नागरिक सशक्त होते हैं और वे अधिक सुरक्षित होते हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल (आईसीईटी) और खनिज सुरक्षा साझेदारी में साझेदारी के लिए भारत-अमेरिका सहयोग की भी प्रशंसा की।