संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के उस आदेश पर मंगलवार को चर्चा की, जिसमें कहा गया था कि म्यांमार को रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाना चाहिए, हालांकि परिषद किसी बयान पर राजी नहीं हो पाई।
राजनयिकों ने गोपनीयता की शर्त पर बंद कमरे में हुई बैठक के बारे में बताया कि म्यांमार के सहयोगी चीन और वियतनाम ने इस पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर परिषद में यूरोपीय संघ के सदस्यों ने एक संयुक्त बयान में म्यांमार से आग्रह किया कि शीर्ष अदालत के फैसले का अनुपालन किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करना ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य हैं।’
फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और एस्टोनिया के साथ ही पोलैंड के पूर्व परिषद सदस्य ने भी म्यांमार से ‘मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय दिलाने के लिए विश्वसनीय कार्रवाई करने’ का अनुरोध किया।
गौरतलब है कि अगस्त 2017 में रोहिंग्या उग्रवादी समूह के हमले के जवाब में म्यांमार के सुरक्षा बलों ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई की जिसके बाद सात लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए। म्यांमार लंबे समय से दावा करता रहा है कि रोहिंग्या बांग्लादेश के ‘बंगाली’ शरणार्थी हैं, हालांकि उनके परिवार से म्यांमार में रहते आ रहे हैं।