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कोरोना के दौरान धनी देशों में क्यों चल रही है रियल एस्टेट की पार्टी, असलियत कर देगी हैरान!

Sat, 15 May 2021 05:15 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

ब्रिटेन की प्रॉपर्टी फर्म जूपला के निदेशक रिचर्ड डॉनेल के मुताबिक महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम का चलन रहा। इसलिए लोगों को घर पर ज्यादा जगह की जरूरत महसूस हुई। बहुत से लोगों ने बड़े आकार का घर खरीदा। वहीं धनी लोग भीड़-भाड़ वाले बड़े शहरों से हट कर कम आबादी वाले उपनगरों में जाकर बसने लगे...
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प्रॉपर्टी - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बीच अर्थव्यवस्था के बाकी क्षेत्र भले मुसीबत में हों, लेकिन धनी देशों में जायदाद के कारोबारी पैसा पीट रहे हैं। जबकि पिछले साल जब महामारी आई थी, तब आशंका जताई थी कि इस सेक्टर भी भारी मार पड़ेगी। तब कुछ विश्लेषकों ने 2008 की मंदी जैसी हालत दोहराए जाने का अंदेशा जताया था। दरअसल, इसके पहले कभी आर्थिक मंदी आई है, जायदाद की कीमत धराशायी हुई है। लेकिन इस बार अलग कहानी देखने को मिली।

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इस बात की पुष्टि अब धनी देशों के संगठन ऑर्गेनाइडेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट से भी हुई है। 37 देश इस संगठन का सदस्य हैं। इसके मुताबिक 2019 की चौथी तिमाही (सितंबर-दिसंबर) से लेकर 2020 की चौथी के बीच ओईसीडी देशों में जायदाद की कीमत में सात फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पिछले दो दशकों के भीतर यह सबसे बड़ा उछाल है। जानकारों का कहना है कि ये ट्रेंड अभी जारी रहने की संभावना है।

रियल एस्टेट से संबंधित कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक में अंतरराष्ट्रीय आवासीय अनुसंधान इकाई की अध्यक्ष केट एवरेट-एलेन ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘जब सभी देशों की सीमाएं खुलेंगी, तो प्रॉपर्टी मार्केट को और प्रोत्साहन मिलेगा। तब अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी अपना पैसा लगाएंगे। अभी हुई बढ़ोतरी मोटे तौर पर घरेलू निवेशकों के कारण हुई है।’
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जानकारों का कहना है कि महामारी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा हुआ। महामारी के दौरान सरकारी कर्मचारियों और कारोबारियों को खरबों डॉलर की आर्थिक सहायता दी। उधर ब्याज दरों में कटौती कर दी गई। होम लोन चुकाने की शर्तें आसान बना दी गईं। इससे घर खरीदने की होड़ लग गई। नतीजा यह हुआ कि कोरोना वायरस के कारण जो मंदी आई, उसके असर से रियल एस्टेट क्षेत्र बेदाग बच गया।

ब्रिटेन की प्रॉपर्टी फर्म जूपला के अनुसंधान निदेशक रिचर्ड डॉनेल के मुताबिक महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम का चलन रहा। इसलिए लोगों को घर पर ज्यादा जगह की जरूरत महसूस हुई। इस कारण बहुत से लोगों ने बड़े आकार का घर खरीदा। दूसरी तरफ यह देखने को मिला धनी लोग भीड़-भाड़ वाले बड़े शहरों से हट कर कम आबादी वाले उपनगरों में जाकर बसने लगे। इसके लिए उन्होंने भी नए मकान खरीदे। स्टॉर्टफोर्ड और विंचेस्टर जसे लंदन के आसपास के इलाकों में इसी कारण जायदाद के दाम तेजी से चढ़े हैं।

हालत यह हो गई कि कई देशों में सरकारों को जायदाद की कीमत को नियंत्रित करने के कदम उठाने पड़े। इसमें सबसे पहले न्यूजीलैंड ने पहल की। वहां पिछले साल लेकर इस वर्ष मार्च के बीच आवासीय प्रॉपर्टी की कीमत में 24 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। इसे देखते हुए पिछले मार्च में प्रधानमंत्री जेसिंडा ऑर्डेन की सरकार ने मकान की कीमतें घटाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। इसके तहत मकान खरीदारी के लिए कर्ज पर मिलने वाली टैक्स छूट घटाई गई। साथ ही सिर्फ निवेश या कारोबार के मकसद से मकान खरीदने वालों पर कार्रवाई की गई।

चीन में मार्च 2019 से मार्च 2020 के बीच बीजिंग, शेनझेन, शंघाई, ग्वांगझाऊ जैसे शहरों में मकानों की कीमत में औसतन 12 फीसदी का इजाफा हुआ। उसके बाद वहां जायजाद की खरीद-बिक्री पर पाबंदियां लगाई गईं, कर्ज लेना कठिन बनाया गया और मकान खरीदने के बाद उसे बेच सकने की न्यूनतम अवधि बढ़ा दी गई।

स्विट्जरलैंड के बैंक यूबीएस में रियल एस्टेट निवेश इकाई के प्रमुख माथियास होल्झे ने सीएनएन से कहा कि महामारी खत्म होने के बात दूसरे देशों में भी मकान खरीद-बिक्री के नियम सख्त बनाए जा सकते हैँ। इसके तहत जमीन और मकानों की खरीद-बिक्री पर अधिक टैक्स लगाया जा सकता है। लेकिन होल्झे ने कहा कि जब तक आम ब्याज दरें निम्न स्तर पर बनी रहती हैं, प्रॉपर्टी मार्केट में तेजी बनी रहेगी। इतिहास की सीख यह है कि प्रॉपर्टी के दाम सिर्फ तभी घटते हैं, जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं।

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