अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार समझौते से ठीक पहले कहा है कि इस सौदे में टैरिफ कर करने से संबंधित कोई समझौता नहीं है। साथ ही अमेरिका ने चीन से अपनी मुद्रा से छेड़छाड़ करने वाले देश का लेबल भी वापस ले लिया है। इससे दुनिया की दो प्रमुख आर्थिक ताकतों के बीच लगभग दो साल से जारी तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।
ट्रंप प्रशासन की फिलहाल 370 बिलियन डॉलर के टैरिफ हटाने की कोई योजना नहीं है। यह चीन के अमेरिका आयात का करीब दो तिहाई है। हालांकि, बुधवार को दोनों देशों के बीच व्यापार सौदे के पहले फेज पर बुधवार को हस्ताक्षर होने हैं।
अमेरिका ने कहा, इन मामलों पर अमेरिका और चीन के बीच किसी प्रकार का कोई लिखित या मौखिक समझौता नहीं हुआ है। साथ ही भविष्य में इन टैरिफ की कमी को लेकर भी कोई समझौता नहीं हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन के साथ व्यापार समझौते के ‘पहले चरण’ से ठीक पहले अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने अपनी छमाही रिपोर्ट में कहा कि युआन में मजबूती आई है और चीन को अब मुद्रा से छेड़छाड़ करने वाले के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
हालांकि, अमेरिका का वित्त विभाग मई में जारी अपनी पिछली रिपोर्ट में चीन पर यह ‘लेबल’ लगाने से बचता दिखा था, लेकिन ट्रंप ने अगस्त में आरोप लगाया था कि चीन व्यापार में पैठ बनाने के लिये जानबूझकर अपनी मुद्रा को कमजोर कर रहा है। चीन के अधिकारियों ने अगस्त में अपनी मुद्रा युआन को डॉलर के मुकाबले सात के स्तर पर पर आने दिया था। इससे शेयर बाजारों में उथलपुथल मची थी तथा ट्रंप ने नाराजगी जताई थी।
अमेरिकी वित्त विभाग ने सोमवार को कहा कि चीन ने गर्मियों के दौरान अपनी मुद्रा के अवमूल्यन के लिए पुख्ता कदम उठाए थे। इससे चीन की मुद्रा अपने 11 साल के निचले स्तर पर आ गई थी। हालांकि हाल के समय में यह डॉलर की तुलना में 6.93 तक मजबूत हुई है। वित्त विभाग ने कहा कि नया व्यापार करार मुद्रा के मुद्दे को हल करेगा।