फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UN: 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चिंताजनक स्थिति में फंसा', ग्लोबल साउथ थिंक टैंक में बोले UNGA अध्यक्ष

Thu, 14 Dec 2023 11:52 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र

सार

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस ने परिषद में निर्णय लेने में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और समान भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही इस पर भी जोर डाला कि सुधार हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। 
विज्ञापन
यूएनजीए अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस ने विश्व निकाय के सदस्यों से बातचीत के जरिए सुरक्षा परिषद सुधार पर गतिरोध को दूर करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चिंताजनक स्थिति में फंसी हुई लगती है। इसका उद्देश्य वैश्विक उत्तर देशों की प्रधानता को पूरा करना है।

विज्ञापन


एक ऐसी परिषद की आवश्यकता...
उन्होंने परिषद में निर्णय लेने में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और समान भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही इस पर भी जोर डाला कि सुधार हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। फ्रांसिस ने कहा, 'महासभा के 78वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में मेरा मानना है कि हमें एक ऐसी परिषद की आवश्यकता है जो अधिक संतुलित, अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, अधिक उत्तरदायी, अधिक लोकतांत्रिक और अधिक पारदर्शी हो।'

दुनिया भर में जंग छिड़ती दिख रही
सुरक्षा परिषद रिफॉर्म पर ग्लोबल साउथ थिंक टैंक के एक सम्मेलन में उन्होंने  कहा कि दुनिया भर में जंग छिड़ती दिख रही है। ऐसे में सुरक्षा परिषद चिंताजनक स्थिति में फंसी हुई लगती है। ऐसा माना जाता है कि परिषद अपने मकसद को पूरा नहीं कर रही है। परिणामस्वरूप, पूरे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता खतरे में है। यूएनजीए प्रमुख ने कहा कि सुधार लाने के लिए सदस्य देशों को बातचीत से मुद्दे का समाधान ढूंढना होगा।
विज्ञापन


परिषद को लोकतंत्रीकरण करना चाहिए
भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने परिषद की वर्तमान संरचना को कालभ्रमित बताया जो पिछले दशकों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आए बदलावों के अनुकूल ढलने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में ग्लोबल नॉर्थ के देशों की प्रधानता है, इसे बदलना होगा। परिषद को न केवल विस्तार करना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करते हुए लोकतंत्रीकरण भी करना चाहिए कि गैर-स्थायी सदस्यों की भी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका हो।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की जरूरत
ऑस्ट्रिया के स्थायी प्रतिनिधि अलेक्जेंडर मार्शचिक, जो परिषद सुधारों के लिए अंतर सरकारी वार्ता (आईजीएन) के सह-अध्यक्ष हैं, ने कहा कि इस विचार को लेकर काफी समानता है कि सुरक्षा परिषद में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की जरूरत है।

परिषद की विकृतियों को सुधारने की क्षमता...
सम्मेलन का संचालन करने वाले ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि सुधारों पर विचार करते समय, हमें इस बात पर पुनर्विचार करना चाहिए कि महासभा को किस तरह से प्रयास करना चाहिए और परिषद की विकृतियों को सुधारने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में महासभा की भूमिका परिषद के अधीन है, यह एक विसंगति है।

उन्होंने कहा, शायद यह ऐसा समय है जब हमें उस नए प्रारूप और उस नए ढांचे को खोजने के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जो काम करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें