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SC: 'शीर्ष अदालत से बिना शर्त मांगी गई माफी व्यापक रूप से हुई प्रकाशित', सुप्रीम कोर्ट से बोले आईएमए अध्यक्ष

Tue, 09 Jul 2024 05:12 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

सुप्रीम कोर्ट में भारतीय चिकित्सा संघ के अध्यक्ष आर.वी. अशोकन ने शीर्ष अदालत को बताया कि समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में उनके विवादित बयानों के लिए सुप्रीम कोर्ट से उनकी बिना शर्त माफी को कई प्रकाशनों में प्रकाशित किया गया है।
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में भ्रामक विज्ञापन मामले में आज पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ भारतीय चिकित्सा संघ की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान भारतीय चिकित्सा संघ के अध्यक्ष आर.वी. अशोकन ने शीर्ष अदालत को बताया कि समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में उनके विवादित बयानों के लिए सुप्रीम कोर्ट से उनकी बिना शर्त माफी को कई प्रकाशनों में प्रकाशित किया गया है। बता दें कि अपने एक साक्षात्कार में भारतीय चिकित्सा संघ अध्यक्ष ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के भ्रामक विज्ञापन मामले के बारे में सवालों के जवाब दिए थे। जबकि ये मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
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'कई जगहों पर प्रकाशित किया गया माफीनामा'
भारतीय चिकित्सा संघ के वकीलों ने जस्टिस हिमा कोहली और संदीप मेहता की पीठ को बताया कि उनकी बिना शर्त माफी को एसोसिएशन के मासिक प्रकाशन, भारतीय चिकित्सा संघ की वेबसाइट और समाचार एजेंसी पीटीआई की तरफ से भी प्रकाशित किया गया है। पटवालिया ने पीठ से कहा, पिछली बार, मैंने (अशोकन) माफी का हलफनामा पेश किया था। माननीय न्यायाधीशों की राय थी कि माफी को साक्षात्कार की तरह उचित प्रचार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा संघ का मासिक प्रकाशन होता है और इसके पहले पृष्ठ पर पूरे पृष्ठ का विज्ञापन है जिसमें कहा गया है कि अध्यक्ष आर.वी. अशोकन ने माफी मांगी है, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष खेद व्यक्त किया है और बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा पेश किया है।

IMA अध्यक्ष ने कोर्ट में दायर किया हलफनामा
मामले में पी. एस. पटवालिया ने आगे कहा कि अगर भारतीय चिकित्सा संघ की वेबसाइट खोली जाती है तो माफीनाम तुरंत पॉप-अप के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा, तीसरा, मैंने माफीनामा पीटीआई समाचार एजेंसी को भेजा है। पीटीआई ने इसे प्रकाशित किया है और इसे अन्य मीडिया हाउसों के साथ भी साझा किया गया है। उन्होंने कहा, कि अशोकन ने भी इस मामले में न्यायालय के समक्ष पेश हलफनामे में बिना शर्त माफी और खेद व्यक्त किया है।
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मामले अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी
वहीं जस्टिस हिमा कोहली और संदीप मेहता की पीठ ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह से पूछा कि क्या उन्होंने अशोकन की तरफ से दायर अतिरिक्त हलफनामा देखा है। इस दौरान प्रतिवादियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने कहा है कि प्रतिवादियों को हलफनामे को पढ़ने और अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत की मदद करने की अनुमति दी जा सकती है। जिसके बाद पीठ ने मामले को 6 अगस्त को आगे की सुनवाई के लिए तय किया। 

ऐसे शुरू हुआ था पूरा विवाद
बता दें कि 29 अप्रैल को पीटीआई के संपादकों के साथ अपने कार्यक्रम '@4 पार्लियामेंट स्ट्रीट' के लिए बातचीत में, भारतीय चिकित्सा संघ अध्यक्ष ने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सर्वोच्च न्यायालय ने एसोसिएशन और निजी डॉक्टरों की कुछ प्रथाओं की आलोचना की। वहीं पतंजलि विज्ञापन केस मामले में 23 अप्रैल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय चिकित्सा संघ को अपने डॉक्टरों पर भी विचार करना चाहिए, जो अक्सर मरीजों को महंगी और गैर-जरूरी दवाइयां लिख देते हैं। अगर आप एक उंगली किसी की ओर उठाते हैं, तो चार उंगलियां आपकी ओर भी उठती हैं।
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