यह भयावह रिपोर्ट तब सामने आई है जब इस्राइल पर दबाव पड़ रहा है कि वह रफाह क्रॉसिंग को खोले, ताकि फलस्तीन के सहयोगी गाजा में मदद को पहुंचा सकें। यूरोपीय संघ के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि अकाल पड़ना लगभग तय है, क्योंकि भुखमरी को युद्ध में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बीच, आईडीएफ ने सोमवार को गाजा पट्टी के सबसे बड़े अस्पताल पर एक और हमला किया। आईडीएफ का कहना है कि वहां आंतकवादी एकत्र हुए थे। वहीं, फलस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में हजारों लोग शरण लिए हुए थे।
आईडीएफ ने दावा किया कि उसने हमास के एक कमांडर को मार गिराया जो हथियारों से लैस था। वह अस्पताल के अंदर छिपा हुआ था। अभियान में एक सैनिक भी मारा गया। इस्राइली सेना ने पिछले साल नवंबर में अल-शिफा अस्पताल पर हमला किया था। तब सेना ने दावा किया था कि हमास ने अस्पताल के भीतर और नीचे कमांड सेंटर बना रखे हैं। आईडीएफ ने भूमिगत कमरों की ओर जाने वाली एक सुरंग का भी पता लगाने का भी दावा किया और कहा कि अस्पताल के अंदर हथियार भी पाए गए। हालांकि, आलोचकों ने आईडीएफ पर लोगों के जीवन को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
विश्व खाद्य कार्यक्रम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में लगभग हर व्यक्ति पर्याप्त भोजन के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 677,000 लोग उच्चतम स्तर की भूख महसूस कर रहे हैं। इसमें से उत्तर गाजा में 210,000 लोग शामिल हैं। गाजा की कुल आबादी 23 लाख है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस्राइल ने गाजा के दक्षिणी शहर रफाह में हमले तेज कर दिए हैं, जैसा कि प्रधामंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बार-बार चेतावनी दी है। युद्ध दस लाख से ज्यादा (गाजा की लगभग आधी आबादी) लोगों को विनाशकारी भुखमरी की ओर धकेल सकता है।