ब्रिटेन में महंगाई
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ब्रिटेन की वार्षिक महंगाई दर के आंकड़े बुधवार को जारी किए गए। पिछले महीने भी इसमें कमी दर्ज की गई है। हालांकि, इसके बाद भी यह दर 10 फीसदी के ऊपर बनी हुई है। जनवरी में यहां उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 10.1 फीसदी रहा। जो दिसंबर के मुकाबले 0.4 फीसदी कम है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का अनुमान है कि इस वित्त की दूसरी छमाही में कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी।
महंगाई दर में कमी के बाद भी रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी की जरूरत की चीजें महंगी हो रही है। इन सब के बीच सवाल ये हैं कि ब्रिटेन में महंगाई के नए आंकड़े क्या हैं? बढ़ती महंगाई का क्या प्रभाव पड़ रहा है? अभी क्या हालात हैं? बीते 12 महीनों में क्या-क्या महंगा हुआ? आगे क्या हो सकता है? आइये जानते हैं…
ब्रिटेन में महंगाई
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नए आंकड़े क्या हैं?
ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से बुधवार को महंगाई के आंकड़े पेश किए गए हैं। NSO ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जनवरी में घटकर 10.1% हो गया, जो सितंबर के बाद से सबसे कम है। यह गिरावट उम्मीद से भी ज्यादा है। अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि जनवरी में वार्षिक सीपीआई दर घटकर 10.3% रह जाएगी। मूल सीपीआई में भी गिरावट आई है, जनवरी में गिरकर यह 5.8 फीसदी हो गया जो दिसंबर में 6.3 फीसदी थी। मूल सीपीआई में बिजली, भोजन, शराब और तम्बाकू शामिल नहीं होते हैं।
ब्रिटेन में महंगाई
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बढ़ती महंगाई के अनुसार कर्मचारियों को नहीं मिल रही वेतन
ताजा आंकड़े कहते हैं कि औसत नियमित वेतन में वृद्धि 2021 में इसी अवधि की तुलना में अक्टूबर और दिसंबर 2022 के बीच 2.5 फीसदी तक गिर गई। यह 2001 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। ब्रिटेन में महंगाई का सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाली वेतन पर पड़ रहा है। बढ़ती कीमतों के कारण कर्मी लगातार वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। श्रमिक वर्ग भी अधिक मजदूरी की मांग कर रहा है। कई सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन में चालू वित्त वर्ष के लिए चार या पांच फीसदी की वृद्धि की गई है, जो दिसंबर में 10.5 फीसदी वार्षिक मुद्रास्फीति दर से कम है। एनएसओ के आंकड़े बताते हैं कि देश में 1989 के बाद से किसी भी वर्ष की तुलना में पिछले साल हड़तालों के कारण सबसे अधिक कार्य दिवस बर्बाद हुए।
महंगाई
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बीते 12 महीनों में क्या कितना महंगा हुआ?
पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई आम जरूरत वाली चीजों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।
वस्तु कीमत में इजाफा
दूध 45.2%
चीनी 40.9%
पनीर और दही 35.2%
अंडे 28.8%
मक्खन 27.1%
भोजन 21.9%
ब्रेड 19%
मछली 15.7%
फल 6%
कोल्ड्रिंक्स 16.2%
कॉफी 14.5%
चाय 13.5%
गैस 129.4%
बिजली 66.7%
ठोस ईंधन 32.9%
रूस और यूक्रेन युद्ध
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ब्रिटेन में महंगाई क्यों बढ़ रही है?
उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के आधार पर बढ़ती मुद्रास्फीति के बड़े कारण रहे हैं। मुद्रास्फीति का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण ऊर्जा की कीमतें हैं, जिसमें घरेलू ऊर्जा शुल्क और सड़क ईंधन की लागत बढ़ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद गैस की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर तक वृद्धि हुई और रूसी आपूर्ति में कटौती के कारण पिछले साल ज्यादातर समय वृद्धि जारी रही। इसी तरह बिजली की कीमतें भी बढ़ी हैं ।
रूस और यूक्रेन कृषि उत्पादों जैसे गेहूं और कुछ धातुओं के बड़े उत्पादक और निर्यातक भी हैं। ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक महंगे हो गए हैं, जिससे ब्रिटेन में खाद्य और सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि हुई है।
दुनिया भर में बढ़ती महंगाई
पूरी दुनिया में 2021 और 2022 के दौरान कई देशों में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति बढ़ी। महामारी में आपूर्ति की कमी भी महंगाई की एक प्रमुख वजह रही। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था महामारी प्रेरित मंदी से उबरी, उत्पादों की मांग में अचानक वृद्धि हुई। बाद में यूक्रेन में संघर्ष से भी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई जिसने दुनियाभर में मुद्रास्फीति को बढ़ा दिया।
आगे क्या राहत मिलेगी?
बैंक ऑफ इंग्लैंड का अनुमान है कि इस साल की दूसरी छमाही में कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी क्योंकि ऊर्जा की लागत कम होने लगी है। लेकिन आंकड़े उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं देने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस साल मुद्रास्फीति अधिक होने के कारण, घरों और व्यवसायों को अभी कुछ समय के लिए महंगाई झेलनी पड़ सकती है।