न्याय विभाग ने इसकी जानकारी देते हुए एक बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया, बोस्टन के निशांत पटेल (41), हरजीत सिंह (49) और अन्य तीन लोग पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम (पीपीपी) लोन में धोखाधड़ी कर लाखों डॉलर लूटने में लगे हुए थे।
अमेरिका में भारतीय मूल के दो लोगों ने कई मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप को स्वीकार किया है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान एक आर्थिक सहायता योजना के तहत लोन में धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
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न्याय विभाग ने इसकी जानकारी देते हुए एक बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया, 'बोस्टन के निशांत पटेल (41), हरजीत सिंह (49) और अन्य तीन लोग पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम (पीपीपी) लोन में धोखाधड़ी कर लाखों डॉलर के फर्जीवाड़े में लगे हुए थे।'
आरोपियों ने झूठे और नकली पीपीपी लोन आवेदन जमा करने की बात स्वीकार की। पीपीपी लोन प्राप्त करने वाली कंपनियों के कर्मचारियों ने भी उन पांच आरोपियों की सहायता की। हालांकि, वे खुद वास्तव में कर्मचारी नहीं थे। इन नकली पे-चेक को चेक कैशिंग स्टोर में दिया गया, जहां अन्य आरोपियों ने सहायता की।
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इस योजना के तहत आरोपी पटेल ने 474,993 यूएस डॉलर का नकली पीपीपी लोन और हरजीत ने 937,379 यूएस डॉलर का लोन प्राप्त किया। योजना में शामिल अन्य तीन लोगों को 14 लाख रुपये मिले। आरोपियों का सजा अगले साल चार जनवरी को तय किया जाना है, जहां उन्हें पांच-पांच साल की सजा सुनाई जाएगी। उनके अलावा 15 अन्य ऐसे हैं जो इस अपराध में आरोपी पाए गए हैं। कोरोनावायरस सहायता, राहत और आर्थिक सुरक्षा (सीएआरईएस) एक्ट 2020अमेरिकी कर्मचारियों, परिवारवालों, छोटे व्यापारियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया था।