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Recap Tayyip Erdogan: भारत से रिश्ते सुधारने में जुटा तुर्किये? यूएन में नहीं अलापा कश्मीर राग; गाजा पर फोकस

Fri, 27 Sep 2024 04:20 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अर्दोआन ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत की थी। इसके साथ ही उन्होंने हर साल संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद़्दे का जिक्र जरूर किया।
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तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन। - फोटो : ANI
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विस्तार
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तुर्किये भारत के साथ अपने रिश्ते सुधारने में जुटा हुआ है। ऐसा इसलिए कि तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे का जिक्र नहीं किया। संयुक्त राष्ट्र में उनका भाषण गाजा की स्थिति पर फोकस रहा। जहां हमास के खिलाफ इस्राइली हमले में अब तक 40 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। 

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दरअसल, 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अर्दोआन ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत की थी। इसके साथ ही उन्होंने हर साल संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद़्दे का जिक्र जरूर किया। मगर इस बार अर्दोआन ने गाजा में फलीस्तिनियों की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर लोगों की मौत को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।

अर्दोआन ने एक बार फिर कहा कि दुनिया पांच से बड़ी है। गाजा दुनिया में बच्चों और महिलाओं के लिए सबसे बड़ा कब्रिस्तान बन गया है। उन्होंने अमेरिका और प्रमुख यूरोपीय संघ के देशों सहित पश्चिमी देशों से इन मौतों को रोकने के लिए कार्रवाई करने का आह्वान किया। 
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अर्दोआन का कश्मीर मुद्दे को छोड़ने का रुख तब सामने आया है कि तुर्किये ब्रिक्स देशों के समूह का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है। इसे लेकर पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि अर्दोआन ने पांच साल में पहली बार संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में कश्मीर मुद्दे का जिक्र नहीं किया। जबकि 2019 से 2023 तक लगातार उनके भाषण में कश्मीर शामिल रहा। इससे भारत और तुर्किये के संबंधों में तनाव पैदा हो गया है।

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में सामान्य भाषण में अर्दोआन ने कहा था कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत होनी चाहिए। इससे कश्मीर में स्थायी शांति की स्थापना होगी। भारत ने अर्दोआन की टिप्पणियों को पूरी तरह से नकार दिया था। अर्दोआन ने कहा था कि तुर्किये को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और अपनी नीतियों पर अधिक गहराई से विचार करना चाहिए।
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