फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमेरिकी कंपनी पाकिस्तान को देगी खतरनाक ड्रोन की तकनीक: पाकिस्तानी सेना के साथ हुई डील, ट्रंप से क्या कनेक्शन?

Sun, 04 Oct 2026 04:33 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी रक्षा कंपनी पावरस ने पाकिस्तानी सेना के साथ ड्रोन तकनीक को लेकर समझौता किया है। कंपनी के पास यूक्रेनी ड्रोन तकनीक से जुड़े अधिकार भी हैं। इससे पहले वह भारत में पारस डिफेंस के साथ गार्डियन-1 प्रणाली पर समझौता कर चुकी है। अब पाकिस्तान को क्या तकनीक मिलेगी? क्या वहां ड्रोन निर्माण भी होगा? भारत की सुरक्षा के लिए यह समझौता कितना अहम हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
विज्ञापन
पाकिस्तान को क्या मिलेगा और यूक्रेनी तकनीक क्यों अहम? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता बढ़ाने की कोशिशों के बीच अमेरिका की रक्षा कंपनी पावरस के साथ उसका समझौता चर्चा में है। पावरस ने 16 सितंबर को पाकिस्तानी सेना के साथ एक समझौता ज्ञापन किया। इसमें मानवरहित हवाई प्रणाली से जुड़ा शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। कंपनी यूक्रेन में विकसित ड्रोन तकनीक के साथ काम कर रही है। ऐसे में पाकिस्तान को इस तकनीक तक पहुंच मिलने की खबर ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि पावरस ने इससे पहले भारतीय कंपनी पारस डिफेंस के साथ भी ड्रोन तकनीक पर समझौता किया था।

विज्ञापन


पावरस ने पिछले साल अक्टूबर में काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद तीन छोटी कंपनियों का अधिग्रहण किया। इसके बाद कंपनी ने मानवरहित हवाई और समुद्री प्रणालियों का निर्माण शुरू किया। कंपनी ने यूक्रेन में विकसित स्वायत्त रक्षा प्रणालियों को व्यावसायिक रूप देने के लिए जी1 एक्सप्लोरेशन के साथ समझौता किया। जी1 के पास यूक्रेनी कंपनियों के सात पूरी तरह विकसित ड्रोन मॉडलों की बौद्धिक संपदा है। इसी सहयोग से गार्डियन ड्रोन इंटरसेप्टर श्रृंखला भी विकसित की गई है। पावरस ने पाकिस्तान के साथ समझौते में शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है, लेकिन इसकी तकनीक और कीमत का खुलासा नहीं किया गया है।

पाकिस्तान को क्या मिलेगा और यूक्रेनी तकनीक क्यों अहम?
पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के मुताबिक पाकिस्तान के साथ शुरुआती ऑर्डर मानवरहित हवाई प्रणालियों की श्रेणी में आता है। हालांकि इसकी सटीक जानकारी गोपनीय रखी गई है। कंपनी की आगे पाकिस्तान में संयुक्त तकनीकी साझेदारी और निर्माण व्यवस्था बनाने की भी योजना है। पाकिस्तान में रक्षा क्षेत्र अभी विकास के शुरुआती दौर में है। पावरस के प्रमुख एंड्रयू फॉक्स ने इसे अमेरिकी कंपनियों के लिए संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया है। कंपनी का यूक्रेनी तकनीक से जुड़ाव इस समझौते को और महत्वपूर्ण बनाता है।
विज्ञापन


पावरस का भारत के साथ पहले क्या समझौता हुआ?
पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले पावरस ने भारत में पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज के साथ करार किया था। जून में हुए इस समझौते के तहत पारस डिफेंस को पावरस की गार्डियन-1 इंटरसेप्टर प्रणाली के निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए भारत में विशेष लाइसेंस दिया गया। यह प्रणाली ड्रोन जैसे हवाई खतरों को रोकने के लिए बनाई गई है। यानी एक ही अमेरिकी कंपनी ने भारत और पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र के साथ अलग-अलग स्तर पर ड्रोन तकनीक से जुड़े समझौते किए हैं।

पावरस के पास कितने बड़े रक्षा सौदे हैं?
पावरस ने हाल में अमेरिका में भी कई बड़े रक्षा सौदे हासिल किए हैं। इनमें अमेरिकी वायुसेना के लिए 3,000 इंटरसेप्टर ड्रोन की 90 करोड़ डॉलर की परियोजना और अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए 1,500 एफपीवी ड्रोन, नियंत्रण किट और स्पेयर पार्ट्स की 25 लाख डॉलर की परियोजना शामिल है। कंपनी को मध्य-पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस ढांचे की सुरक्षा के लिए भी 2.23 करोड़ डॉलर का समझौता मिला है। कंपनी का विस्तार बड़े रक्षा कारोबारियों के बीच हुआ है। पावरस का प्रस्तावित विलय ऐसी कंपनी के साथ है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बेटों डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप के निवेश से जुड़ाव है। हालांकि उन्हें निष्क्रिय निवेशक बताया गया है और कंपनी के कामकाज में उनकी भूमिका नहीं बताई गई है।

पाकिस्तान के साथ समझौते से भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता बढ़ाने की कोशिशों के बीच अमेरिकी कंपनी के साथ यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान सेना और पावरस के बीच हुई बातचीत में रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता बढ़ाने पर सहयोग की बात हुई थी। पावरस ने पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर ड्रोन निर्माण और तकनीकी सहयोग की संभावना भी जताई है। दूसरी ओर, भारत के साथ कंपनी पहले ही गार्डियन-1 प्रणाली पर काम कर रही है। ऐसे में पाकिस्तान को मिलने वाली मानवरहित हवाई तकनीक और भविष्य में संभावित स्थानीय निर्माण पर नजर रहेगी। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने का यह घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें