फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी हिंद प्रशांत महासागर इलाके में यूरोपीय देशों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वहीं शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सुझाव दिया कि यूरोपीय देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र को अमेरिका पर छोड़ देना चाहिए।
शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध ने सीमाओं को धुंधला कर दिया है। उन्होंने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया ने जिस तरह से रूस की यूक्रेन के खिलाफ मदद की, उसका वैश्विक परिदृश्य पर बड़ा असर पड़ा है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए यूक्रेन के मोर्चे पर अपने सैनिक भेजे तो चीन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की परवाह किए बगैर रूस को आर्थिक और तकनीकी मदद दी।
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'यूक्रेन हारा तो पूरी दुनिया पर होगा असर'
सिंगापुर में आयोजित हो रहे सुरक्षा सम्मेलन शंगरी ला डायलॉग में लिथुआनिया की रक्षा मंत्री डोविले साकलीने ने कहा कि अगर युक्रेन की युद्ध में हार हो जाती है तो इसका एशिया पर व्यापक असर होगा। इससे चीन का ताइवान और दक्षिण चीन सागर के इलाकों पर दावा भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि 'अगर रूस, यूक्रेन के खिलाफ जीत जाता है तो इसका असर सिर्फ यूरोप पर ही नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया पर होगा। इससे स्पष्ट संदेश जाएगा कि छोटे देश, खासकर हिंद प्रशांत महासागर के देशों की सीमाओं को कोई भी नजरअंदाज कर सकता है और कोई भी बहाना बनाकर आक्रमण किया जा सकेगा।'
हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र पर बढ़ा फोकस
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी हिंद प्रशांत महासागर इलाके में यूरोपीय देशों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वहीं शनिवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सुझाव दिया कि यूरोपीय देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र को अमेरिका पर छोड़ देना चाहिए। लिथुआनिया की रक्षा मंत्री ने कहा कि 'रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया का बढ़ता गठजोड़ खतरनाक है और एकजुट होकर ही इसका मुकाबला किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि 'रूस को ड्रोन की सप्लाई करने वाला ईरान ही है। डोविले साकलीने ने कहा कि हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र पर अमेरिका को ज्यादा फोकस करने की जरूत है, लेकिन यह अकेले अमेरिका की ही जिम्मेदारी नहीं है।'