इथोपिया के उत्तरी राज्य तिगरे में लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। अब तक सैकड़ों सैनिक और अनगिनत संख्या में नागरिक वहां मारे जा चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि हिंसा की चपेट में पूरा देश आ सकता है। इसका असर आसपास के दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है। सरकारी विरोधी लड़ाकों के दागे हुए रॉकेट पड़ोसी देश इट्रिया की राजधानी असमारा तक जाकर गिरे हैं।
वैसे तो झड़पें इस साल के आरंभ से चल रही थीं, लेकिन पिछले चार नवंबर से युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। उस रोज इथोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद ने अपनी सेना को तिगरे क्षेत्र में कार्रवाई का आदेश दिया। उसके पहले तिगरे में सेना के एक शिविर पर हमला हुआ था। प्रधानमंत्री के सेना को दिए आदेश के बाद तिगरे क्षेत्र की मुख्य राजनीतिक पार्टी ने वहां के बलों को सेना की उत्तरी कमांड चौकी पर कब्जा कर लेने का आदेश दिया। स्थानीय बलों ने वहां सेना के उपकरण हथिया लिए और वहां तैनात सैनिकों को बंदी बना लिया।
अबिय अहमद के सत्ता में आने के पहले इथोपिया पर 27 साल तक तिगरे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने शासन किया। हालांकि तिगरे क्षेत्र की आबादी पूरे देश की आबादी का लगभग छह फीसदी ही है, लेकिन उस इलाके की ताकतों का राष्ट्रीय राजनीति पर लंबे समय तक वर्चस्व रहा। लेकिन उनके शासनकाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन की घटनाएं हुईं। तब सरकार विरोधियों को यातना दिए जाने के आरोप बड़े पैमाने पर लगे थे। इससे तिगरे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (टीपीएलएफ) की सरकार अलोकप्रिय हुई। इसी कारण अबिय अहमद की सरकार सत्ता में आई।
अबिय अहमद का कहना है कि टीपीएलएफ को सत्ता में भागीदारी देने की उन्होंने पूरी कोशिश की। उसे राष्ट्रीय संसद में स्पीकर का पद दिया गया। साथ ही कई मंत्री पद भी उसे मिले। लेकिन टीपीएलएफ इससे संतुष्ट नहीं हुआ। इसलिए दोनों पक्षों में तनाव बना रहा। टीपीएलएफ का आरोप था कि अबिय अहमद सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है और वह तय समय पर चुनाव नहीं करवा रही है।