बांग्लादेश से भारत भागने की कोशिश कर रहे तीन पत्रकारों और एक अन्य युवक को पुलिस ने उत्तरी मैमनसिंह सीमा के पास से पकड़ा।
प्रमुख पत्रकार मोजम्मेल बाबू, निजी एकटूर टीवी के मुख्य संपादक और भोरेर कागोज के संपादक श्यामोल दत्ता को सोमवार तड़के एक कार में भागने की कोशिश करते समय हिरासत में लिया गया। दोनों बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाते थे। पुलिस ने कहा कि हिरासत में लिए गए अन्य लोगों में एकटूर टीवी रिपोर्टर महबाबुर रहमान और ड्राइवर सेलिम शामिल हैं। उन्हें सुबह छह बजे मैमनसिंह जिले की धोबौरा सीमा की जीरो लाइन के पास पड़ोस के लोगों ने पकड़ा था। ग्रामीणों ने उन्हें मैमनसिंह पुलिस को सौंप दिया।
बताया जाता है कि बाबू और दत्ता दोनों पर स्थानीय लोगों ने हमला किया। लोगों ने पुलिस को बुलाने से पहले उनके पास मौजूद पैसे छीन लिए। पुलिस ने कहा कि वे हमारी हिरासत में हैं और पुलिस स्टेशन में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मैमनसिंह पुलिस आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के लिए उन्हें ढाका ले जाने के लिए संबंधित अधिकारियों का इंतजार कर रही है।
इससे पहले 21 अगस्त को ढाका में पुलिस ने एक अन्य पत्रकार दंपती फरजाना रूपा और शकील अहमद को फ्रांस भागने की कोशिश करते वक्त गिरफ्तार किया था। दंपती पर आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान हत्या का आरोप लगा था।
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के विरोध में हुए आंदोलन के बाद कई अन्य पत्रकारों के खिलाफ हत्या के आरोप में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इस पर अंतरराष्ट्रीय पत्रकार अधिकार समूहों ने चिंता जताई है।वहीं प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने संकेत दिया कि पत्रकारों के खिलाफ आरोपों की पूरी जांच होने तक उन्हें गिरफ्तार किए जाने की संभावना नहीं है।
बांग्लादेश में क्या हुआ
नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ अभूतपूर्व सरकार विरोधी छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया। बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद देश भर में भड़की हिंसा की घटनाओं में 230 से अधिक लोग मारे गए, सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 600 से अधिक हो गई है।