सीएनएन ने एक रिपोर्ट में बताया है कि ब्रसेल्स स्थित अधिकारी अब चिंतित हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस टीवी चैनल से कहा- ‘अंग्रेजी भाषी राज्य, जो चीन के खिलाफ बहुत आक्रामक रहे हैं, उन्होंने अपना गठबंधन बना लिया है।’ अधिकारी ने कहा कि इन्हीं देशों ने अफगानिस्तान और इराक पर हमलों की पहल की थी। उसने कहा- ‘उसके क्या नतीजे रहे, हम जानते हैं।’
विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाने का अमेरिका ने जिस एकतरफा ढंग से फैसला लिया, उससे ईयू में पहले से नाराजगी थी। अब उसके ऑकुस गठबंधन बना लेने से ईयू देशों का गुस्सा फूट पड़ा है। ईयू अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडेन ने कहा था कि सहभागिता के साथ कदम उठाने के लिहाज से ‘अमेरिका अब वापस आ गया है।’ लेकिन उनका अब तक का काम पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिकी फर्स्ट’ नीति की तरह ही चल रहा है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने ऑकुस के गठन पर अपनी दी गई आक्रोश भरी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें ट्रंप की याद आ गई है।
थिंक टैंक ऑस्ट्रियन इंस्टीट्यूट फॉर यूरोपियन एंड सिक्योरिटी पॉलिसी की निदेशक वेलिना तचाकारोवा ने सीएनएन से कहा- ‘ये तथ्य कि ईयू के बजाय अमेरिका ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने सुरक्षा संबंधों में अधिक राजनीतिक पूंजी लगाना चाहता है, काफी कुछ साफ कर देता है। इसका अर्थ यह है कि ईयू को पहले इंडो-पैसिफिक में अपनी ताकत बनानी पड़ेगी, तभी उसके अंग्रेजी भाषी सहयोगी देश उसे गंभीरता से लेंगे।’