एक अध्ययन के मुताबिक, कोरोना वायरस की शरीर में दाखिल होने के बाद नाक में मिले प्रतिरोध से भविष्य में कोविड-19 हत्या होती है। एमआईटी, हावर्ड और मिसीसिपी विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न प्रमुख संस्थान में 18 महीने चले दिन के बाद दावा किया गया कि गंभीर हालत में पहुंचे मरीज में वायरस को रोकने के लिए शुरुआती प्रतिरोध हुआ ही नहीं या फिर हुआ अभी तो वह बेहद कमजोर था।
एमआईटी और हार्वर्ड सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने किया दावा
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, यह शुरुआती प्रतिरोध संक्रमित की नाक से ही शुरू हो जाना चाहिए और अगर संक्रमण सांस लेने की प्रणाली के ऊपरी हिस्से तक सीमित रहे तो कोई मध्यम और लक्षण सहित रहता है।
निचले श्वसन तंत्र और फेफड़ों तक पहुंचा वायरस जानलेवा बन सकता है। कि जांच के लिए शुरुआती समय में आए मरीजों की नाक से लिए गए नमूनों के विश्लेषण के आधार पर यह खुलासा हुआ है इन मरीजों की तुलना उन मरीजों से की गई जिनमें कोशिश संक्रमण गंभीर हुआ, उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा।
परिणाम विश्लेषण में सामने आया कि गंभीर रूप से संक्रमित हुए लोगों में वायरस के खिलाफ शुरुआती समय में बेहद कमजोर या ना के बराबर प्रतिरोध शरीर ने किया था। अध्ययन करता हूं में शामिल जोश देवास माउंटेंस के अनुसार शुरुआती समय में शरीर द्वारा वायरस के प्रति कीजिए प्रतिरोध को समझ लिया जाए तो इसके गंभीर होने की संभावना का अभी पता किया जा सकता है ऐसा करने से कोविड-19 गंभीर अमीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन से कोरोना के बेहतर इलाज में मदद
- यहां कड़ा प्रतिरोध नहीं मिलने पर रोग ज्यादा तेजी से श्वसन तंत्र में पहुंचेगा।
- खोज से कोविड-19 के इलाज में दबाव का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
- अध्ययन के सैंपल कोविड-19 के चरम पर पहुंचने से पहले लिए गए थे। यानी नाक से ही रोग की जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
- संक्रमण का शुरुआती समय में रोग को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक इस समय में बेहतर इलाज देने पर काम कर सकते हैं।
- उन जैविक संकेतों की भी पहचान की जा सकती है जिससे मरीजों में रोक अमीर होगा या नहीं यह पहचाना जा सकेगा।