तालिबान की रणनीति यह दिखती है कि पहले देश के पूरे ग्रामीण क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया जाए। ये हिस्सा अफगानिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 85 फीसदी है। तालिबान इसमें पूरी तरह सफल हो गया, तो उसका ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान, और पाकिस्तान के बलूचिस्तान से लगी सीमा चौकियों पर पूरा नियंत्रण हो जाएगा। इसी के साथ तालिबान ने प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। जानकारों के मुताबिक अपने कब्जे में आ रही राजधानियों में अपने कदम जमाने के बाद वह काबुल पर कब्जे की लड़ाई छेड़ेगा।
हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि काबुल पर कब्जा करने में तालिबान को 90 दिन लगेंगे, लेकिन कई जानकार मानते हैं कि महीने भर के अंदर भी तालिबान इसमें सफल हो सकता है। मुमकिन है कि 9/11 (2001 में 11 सितंबर को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमलों) की बीसवीं बरसी तक ही तालिबान काबुल को अपने नियंत्रण में ले ले। उसी आतंकवादी हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान को अल-कायदा और तालिबान से मुक्ति दिलाने के लिए वहां हमला किया था। लेकिन 20 साल बाद अब तालिबान विजयी होता दिख रहा है।
तालिबान की सफलताएं पश्चिमी देशों के अलावा भारत, रूस, चीन, ईरान और अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी गहरी चिंता का विषय हैं। मगर ये देश मिल कर भी अफगानिस्तान के लिए कोई ऐसा समाधान ढूंढने में अब तक नाकाम हैं, जिससे वहां फिर से तालिबानी राज कायम ना हो सके।