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गर्भपात अधिकार: 'गेमचेंजर' साबित होगा मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Sat, 11 Sep 2021 03:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मैक्सिको सिटी

सार

मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले के तहत गर्भपात कराने को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है। मैक्सिको में रोमन कैथोलिक ईसाइयों की बहुलता है। इस पंथ में गर्भपात को पाप माना जाता है। इसलिए यहां आए फैसले की चर्चा सारी दुनिया में हो रही है...
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गर्भपात कानून - फोटो : Social Media
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विस्तार
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गर्भपात के मामले में इस हफ्ते मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, उसे पूरे लैटिन अमेरिका के लिए गेम चेंजर समझा जा रहा है। ये फैसला उस समय आया है, जब अमेरिका के टेक्सस राज्य में महिलाओं के गर्भपात अधिकार को बेहद सीमित करने का कानून लागू कर दिया गया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि जिस समय अमेरिका में प्रतिगामी दिशा अपनाई गई है, उस समय मैक्सिको ने एक दूरगामी महत्व का प्रगतिशील कदम उठाया है।  

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मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले के तहत गर्भपात कराने को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है। मैक्सिको में रोमन कैथोलिक ईसाइयों की बहुलता है। इस पंथ में गर्भपात को पाप माना जाता है। इसलिए यहां आए फैसले की चर्चा सारी दुनिया में हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की जज लुई मारिया अगुइलार ने इस फैसले में कहा- ‘भविष्य में किसी महिला या गर्भवती व्यक्ति पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। आज जेल जाने और बदनाम होने का डर लोगों के दिमाग पर इस तरह छाया रहता है कि महिलाएं आजादी से गर्भपात नहीं करवा पातीं।’

इस फैसले के पहले मैक्सिको के 32 में से सिर्फ चार प्रांतों में गर्भपात अपराध नहीं था। बाकी 28 प्रांतों में गर्भपात करवाने पर 15 दिन से छह साल तक की कैद हो सकती थी। अब पूरे देश में गर्भपात अपराध की श्रेणी से बाहर हो गया है। इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यूयॉर्क स्थित मानव अधिकारी अधिवक्ता और गैर-सरकारी संगठन वूमन्स इक्वालिटी सेंटर की निदेशक पॉला अविला-गुइलेन ने कहा कि इसके साथ ही मैक्सिको अब प्रजनन अधिकार सुरक्षित करने वाले देशों की अग्रिम कतार में आ गया है। इसके पहले लैटिन अमेरिकी देशों के बीच सिर्फ अर्जेंटीना में गर्भपात अपराध नहीं था। वहां भी ये फैसला इसी साल ही हुआ।

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अर्जेंटीना की संसद ने कानून पारित कर गर्भधारण के बाद 14 हफ्तों के अंदर गर्भपात कराने को वैध बना दिया है। बलात्कार के कारण गर्भवती हुईं महिलाएं 14 हफ्तों के बाद भी गर्भपात करवा कर सकती हैं। इसके अलावा अगर डॉक्टर ये प्रमाणित करें कि गर्भधारण के कारण किसी महिला की जान खतरे में है, तो कोई भी महिला 14 हफ्तों के बाद गर्भपात करवा सकती है।

दूसरी तरफ लैटिन अमेरिकी देश एल सल्वाडोर में दुनिया का सबसे सख्त गर्भपात विरोधी कानून है। उसके तहत गर्भपात करवाने वाली महिला को 40 साल तक की कैद हो सकती है।

मैक्सिको में कैथोलिक्स फॉर राइट्स टू डिसाइड नाम के संगठन की प्रवक्ता आइदा गार्सिया ने इस फैसले पर कहा- ‘अचरज की बात यह है कि कैथोलिक आबादी वाले दूसरे सबसे बड़े देश में गर्भपात को अपराध की श्रेणी से हटाने के पक्ष में फैसला आया है। यह मानव अधिकारों की रक्षा की दिशा में प्रगति है।’

टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिकी राज्य टेक्सस की सीमा मैक्सिको से लगी हुई है। उन्होंने कहा है कि पिछले हफ्ते टेक्सस की विधायिका ने गर्भपात संबंधी महिला अधिकार के खिलाफ सख्त कदम उठाया, जिस पर स्टे लगाने से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। जबकि सीमापार मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है, जिससे महिलाओं का ये अधिकार आगे बढ़ा है। इस लिहाज से उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीपों में अब वैचारिक क्रांति की मशाल मैक्सिको ने थाम ली है।
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