अर्जेंटीना की संसद ने कानून पारित कर गर्भधारण के बाद 14 हफ्तों के अंदर गर्भपात कराने को वैध बना दिया है। बलात्कार के कारण गर्भवती हुईं महिलाएं 14 हफ्तों के बाद भी गर्भपात करवा कर सकती हैं। इसके अलावा अगर डॉक्टर ये प्रमाणित करें कि गर्भधारण के कारण किसी महिला की जान खतरे में है, तो कोई भी महिला 14 हफ्तों के बाद गर्भपात करवा सकती है।
दूसरी तरफ लैटिन अमेरिकी देश एल सल्वाडोर में दुनिया का सबसे सख्त गर्भपात विरोधी कानून है। उसके तहत गर्भपात करवाने वाली महिला को 40 साल तक की कैद हो सकती है।
मैक्सिको में कैथोलिक्स फॉर राइट्स टू डिसाइड नाम के संगठन की प्रवक्ता आइदा गार्सिया ने इस फैसले पर कहा- ‘अचरज की बात यह है कि कैथोलिक आबादी वाले दूसरे सबसे बड़े देश में गर्भपात को अपराध की श्रेणी से हटाने के पक्ष में फैसला आया है। यह मानव अधिकारों की रक्षा की दिशा में प्रगति है।’
टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिकी राज्य टेक्सस की सीमा मैक्सिको से लगी हुई है। उन्होंने कहा है कि पिछले हफ्ते टेक्सस की विधायिका ने गर्भपात संबंधी महिला अधिकार के खिलाफ सख्त कदम उठाया, जिस पर स्टे लगाने से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। जबकि सीमापार मैक्सिको के सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है, जिससे महिलाओं का ये अधिकार आगे बढ़ा है। इस लिहाज से उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीपों में अब वैचारिक क्रांति की मशाल मैक्सिको ने थाम ली है।