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नेपाल: अब नजर नेपाली कांग्रेस के अधिवेशन पर, देउबा की ताकत का होगा इम्तिहान

Fri, 03 Dec 2021 03:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर पौडेल खेमा किसी एक उम्मीदवार पर सहमत नहीं हुआ, तो देउबा के पार्टी अध्यक्ष बनने की पूरी संभावना होगी। वैसे पार्टी में एक गुट पूर्व महासचिव कृष्ण प्रसाद सितौला का भी है। समझा जाता है कि सितौला की पार्टी में एक प्रमुख भूमिका है...
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sher bahadur deuba - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद अब देश का ध्यान सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस के अधिवेशन पर टिक गया है। नेपाली कांग्रेस का 14वां राष्ट्रीय अधिवेशन 10 से 12 दिसंबर तक काठमांडो में होगा। अभी नेपाली कांग्रेस में राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का चुनाव चल रहा है। अब 61 जिलों से प्रतिनिधियों के लिए हुए चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं।

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नेपाली मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक इस अधिवेशन के दौरान प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और वरिष्ठ नेता रामचंद्र पौडेल के गुटों के बीच जोरदार शक्ति परीक्षण होने की संभावना है। इस बीच के वरिष्ठ नेता बिमलेंद्र निधि के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की घोषणा कर देने से देउबा को तगड़ा झटका है। उधर पौडेल गुट को कई प्रभावशाली नेताओं का समर्थन मिल गया है। उनमें पार्टी महासचिव शशांक कोइराला, पूर्व पार्टी उपाध्यक्ष प्रकाश मान सिंह और वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला शामिल हैँ।

पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए मची होड़

अखबार काठमांडो पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिमलेंद्र निधि का प्रमुख गढ़ प्रांत-2 है। वहां से 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने की संभावना है। उधर बताया जाता है कि पौडेल खेमे में कई नेता अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा दिखा रहे हैं। पौडेल खुद चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। जबकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रकाश मान सिंह, शशांक कोइराला, और शेखर कोइराला भी पार्टी का अध्यक्ष बनने की होड़ में खुद को शामिल बता रहे हैं।

देउबा खेमे के सूत्रों ने कहा है कि अगर पौडेल खेमे से एक से अधिक उम्मीदवार सामने आए, तो प्रधानमंत्री देउबा के लिए वह अच्छी बात होगी। पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए किसी उम्मीदवार को उपस्थित प्रतिधिनियों के बीच कम से कम 50 फीसदी वोट हासिल करना जरूरी होगा। अधिवेशन में चार हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। अधिवेशन के दौरान पार्टी अध्यक्ष के अलावा दो उपाध्यक्ष, दो महासचिव, आठ संयुक्त महासचिव और कार्यसमिति के 134 सदस्यों का भी चुनाव होगा।

पौडेल खेमा नहीं माना तो देउबा बन सकते हैं अध्यक्ष

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर पौडेल खेमा किसी एक उम्मीदवार पर सहमत नहीं हुआ, तो देउबा के पार्टी अध्यक्ष बनने की पूरी संभावना होगी। वैसे पार्टी में एक गुट पूर्व महासचिव कृष्ण प्रसाद सितौला का भी है। समझा जाता है कि सितौला की पार्टी में एक प्रमुख भूमिका है। इसीलिए प्रधानमंत्री देउबा हाल में उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश में रहे हैं।

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नेपाली कांग्रेस का पिछला राष्ट्रीय अधिवेशन 2016 में हुआ था। तब अध्यक्ष पद के चुनाव के पहले चरण में किसी प्रत्याशी को 50 फीसदी वोट नहीं मिला। दूसरे चरण के मतदान में सितौला ने देउबा का समर्थन किया, जिसकी वजह से पाला उनकी तरफ झुक गया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सितौला अब चाहते हैं कि उनके गुट के नेताओं को महासचिव, संयुक्त महासचिव और कार्यसमिति के चुनाव में पर्याप्त जगह मिले। तभी वे देउबा को अपने समर्थन का वादा करेंगे।

इसीलिए देउबा और पौडेल गुटों के उम्मीदवारों की सूची का यहां बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। पर्यवेक्षकों की राय है कि उम्मीदवारों की सूची देखने के बाद ये अनुमान लगाना संभव हो सकता है कि पलड़ा किसकी तरफ झुकेगा।

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