फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच संघर्ष: एक मंदिर कैसे बना 800 किमी. सीमा पर टकराव का केंद्र, किस देश की कितनी ताकत?

Thu, 24 Jul 2025 08:21 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच टकराव का मुद्दा क्या है? इस तनाव के बीच अचानक संघर्ष क्यों भड़क गया? क्या यह संघर्ष आगे युद्ध में बदल सकता है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
थाईलैंड-कंबोडिया के बीच छिड़ा संघर्ष। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रूस-यूक्रेन युद्ध और इस्राइल-उसके पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद अब पूर्वी एशिया में भी जंग की आहट सुनाई देने लगी हैं। दरअसल, गुरुवार को थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक मुद्दे पर वर्षों से चला आ रहा तनाव अब हिंसक टकराव में बदल गया। कंबोडिया के हमले में कम से थाईलैंड के कम 12 लोगों के मारे जाने की खबर है। उधर थाई सेना की तरफ से भी कंबोडिया की सीमा पर तैनात उसके जवानों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। थाईलैंड ने सीमा पर एफ-16 लड़ाकू विमान भी तैनात कर दिए हैं। स्थिति को बिगड़ता देख कंबोडिया ने तत्काल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक बुलाई है। 
विज्ञापन


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच टकराव का मुद्दा क्या है? इस तनाव के बीच अचानक संघर्ष क्यों भड़क गया? क्या यह संघर्ष आगे युद्ध में बदल सकता है? आइये जानते हैं...

पहले जानें- किस मुद्दे को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच तनाव?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पूरा विवाद एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। दरअसल, 1907 में जब कंबोडिया जब फ्रांस के साम्राज्य के अंतर्गत आता था, तब सियाम और कंबोडिया के बीच सीमाएं तय की गई थीं। हालांकि, आगे चलकर 817 किमी लंबी इस सीमा को लेकर विवाद शुरू हो गए। खासकर कुछ ऐतिहासिक मंदिरों को लेकर दोनों देशों में यह विवाद खासा गहरा गया। 

वैश्विक नक्शे पर थाईलैंड और कंबोडिया की सीमाओं को दोनों ही देश एकतरफा करार देने लगे। आखिरकार दोनों देश सीमा विवाद और मंदिरों पर अधिकार के मुद्दे को 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस- आईसीजे) ले गए। आईसीजे ने फैसला किया कि 11वीं सदी का प्रीह विहार मंदिर कंबोडिया के हिस्से में आता है। यानी इसे थाईलैंड के दायरे से बाहर कर दिया गया। थाईलैंड ने फैसले के बाद इस मंदिर पर अधिकार छोड़ दिए। हालांकि, आसपास के क्षेत्र में अपनी पहुंच और दावा दोनों बरकरार रखे। 

यह पूरा संघर्ष 2008 में फिर भड़क उठा, जब कंबोडिया ने प्रिया विहार ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को की वैश्विक धरोहरों में शामिल कराने की कोशिश की। थाईलैंड ने इसका भरसक विरोध किया और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अचानक ही संघर्ष में बदल गई। इसमें 20 लोगों की मौत हुई, जबकि सीमा के आसपास रहने वाले हजारों लोग बेघर हो गए। 

कुछ समय बाद जब यह तनाव बना रहा तो कंबोडिया फिर आईसीजे की शरण में पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फिर से कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, इस बार भी कोर्ट ने विवादित क्षेत्रों को लेकर कोई निर्णय नहीं दिया। दूसरी तरफ थाईलैंड ने आईसीजे के क्षेत्राधिकार को मानने से ही इनकार कर दिया। हालांकि, 2013 के बाद से दोनों ही देशों के बीच तनाव कुछ हद तक कम हो गया। 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कंबोडिया ने अपने यहां थाईलैंड की फिल्में और टीवी शो प्रतिबंधित कर दिए। साथ ही पड़ोसी देश से ईंधन, फल और सब्जियों का आयात बंद कर दिया। इतना ही नहीं कंबोडिया ने इंटरनेट और ऊर्जा क्षेत्र में भी थाईलैंड का बहिष्कार किया।

हिंसक कैसे हो गया थाईलैंड-कंबोडिया का टकराव?
गुरुवार को कंबोडिया की तरफ से जब थाईलैंड के खिलाफ फैसले लिए ही जा रहे थे, इस दौरान खबर आई कि इन देशों की सीमा पर जवानों के बीच टकराव शुरू हो गया। इस बार संघर्ष का केंद्र 1000 साल से भी पुराना हिंदू मंदिर 'प्रसात ता मोअन थोम' रहा। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर पहले गोलीबारी का आरोप लगाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली फायरिंग सुबह करीब 8.20 बजे हुई। यह गोलीबारी मंदिर के पूर्व में 200 मीटर की दूरी पर हुई। 

Thailand-Cambodia Conflict: थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर भड़का संघर्ष, हवाई हमलों और गोलीबारी में अब तक 12 की मौत

क्या है ता मोअन थोम मंदिर, जो बना दो देशों के टकराव का केंद्र?
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा के करीब मौजूद यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर दांग्रेक पहाड़ियों में है। इसे बनाने का श्रेय खमर शासक राजा उदयआदित्यवर्मन-II को दिया जाता है। इस मंदिर में प्राकृतिक चट्टान से बना एक शिवलिंग भी है। इतिहासकारों के मुताबिक, यह मंदिर 12वीं सदी में बना था। यानी यह मंदिर अपने समय का सबसे पुराना है। 

इस मंदिर की लोकेशन की वजह से दोनों देशों के बीच संघर्ष छिड़ा है। दरअसल, सीमा के करीब जिस जगह यह मंदिर है, उस जगह पर दोनों ही दावा करते हैं। इसी साल फरवरी में जब कंबोडिया के सैनिकों ने यहां राष्ट्रगान गाया तो थाईलैंड के सैनिक उनके सामने आ गए। बाद में दोनों पक्षों में जबरदस्त जुबानी जंग देखी गई थी। 

सिर्फ ता मोअन थोम मंदिर ही नहीं, बल्कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच प्रीह विहार, ता मुएन थोम और ता मोअन थोम मंदिर पर भी रहा है। 

1. थाईलैंड का क्या कहना है?
थाई सैनिकों का कहना है कि उन्हें पहले कुछ ड्रोन्स की आवाज सुनाई दी और फिर उन्हें छह सशस्त्र कंबोडियाई सैनिक दिखे। इसके बाद से ही विवादित सीमा के पास छह स्थानों पर संघर्ष की खबरें आई हैं।

थाई सेना का कहना है कि उसकी तरफ 11 आम लोगों की मौत हुई है, जबकि कुछ अन्य घायल हुए हैं। दावा किया गया है कि कंबोडियाई सेना ने थाईलैंड के सुरिन प्रांत में सुबह 9.40 बजे दो बीएम-21 रॉकेट्स दागे। इसके बाद 86 प्रांतों से 40,000 लोगों को निकाल लिया गया है। 

2. कंबोडिया ने क्या पक्ष रखा?
दूसरी तरफ कंबोडिया ने कहा है कि थाईलंड की तरफ से उसके दो प्रांतों में गोलीबारी की गई है। एक प्रवक्ता ने कहा कि सुबह करीब 8.46 बजे थाई सेना ने उसके क्षेत्र में घुसने की कोशिश की और कंबोडियाई सैनिकों पर फायरिंग की। कंबोडिया का आरोप है कि इस दौरान थाईलैंड ने फाइटर जेट्स से वाट केओ सिक्खा किरिसवारा की एक सड़क पर बम भी बरसाए। इस क्षेत्र में कंबोडिया की सेना की एक टुकड़ी सुरक्षा के लिए रखी गई है। 

थाईलैंड की ओर से सीमा पर एफ-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडिया में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी आईं। रॉयल थाई एयरफोर्स ने सभी विमानों के सुरक्षित लौटने की पुष्टि भी की है। 



Border Dispute: थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद गहराया, दोनों देशों ने वापस बुलाए राजदूत; रिश्ते निचले स्तर पर

थाईलैंड-कंबोडिया संघर्ष के युद्ध में बदलने की कितनी संभावना?
विश्लेषकों का मानना है कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी संघर्ष के युद्ध में बदलने की संभावना काफी कम है। स्थानीय एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच गोलीबारी की घटनाएं पहले भी हुई हैं, लेकिन तब ऐसे मामले जल्द शांत हो जाते थे। हालांकि, थाईलैंड में बीते कुछ समय में बढ़ते राष्ट्रवाद के चलते राजनीतिक स्तर पर भी सीमा विवाद को लेकर सख्ती दिखाई गई है। 

एक फोन कॉल, जिससे खतरे में आई थी थाईलैंड की पीएम की कुर्सी?
इसी साल जून में थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेइतोंग्तर्न शिनावात्रा की तरफ से कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुआ मानेत के पिता हुन सेन को किए गए एक फोन ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। दरअसल, इस फोन कॉल को खुद हुन सेन ने लीक किया था। इसमें शिनावात्रा को हुन सेन को अंकल बुलाते और थाईलैंड की सेना की आलोचना करते सुना गया था।

कंबोडिया के पीएम और थाईलैंड के प्रधानमंत्री के परिवार अपने-अपने देशों में लंबे समय से राजनीति में शामिल रहे हैं। यह दोनों परिवार आपस में भी काफी करीबी माने जाते हैं। हालांकि, एक फोन कॉल के लीक होने के बाद पेइतोंग्तर्न  शिनावात्रा को पीएम पद से हटाए जाने की मांग उठने लगी। इसी महीने पेइतोंग्तर्न शिनावात्रा को संवैधानिक अदालत ने पद से निलंबित कर दिया था। स्थानीय विश्लेषकों के मुताबिक, इसके बाद थाई सरकार में यह डर बैठ गया है कि लोग उसके बारे में नकारात्मक सोच रख रहे हैं।

इसके चलते जब थाईलैंड के कुछ सैनिक कथित तौर पर कंबोडियाई लैंडमाइन के चलते घायल हुए तो प्रधानमंत्री शिनावात्रा को दबाव में देखा जाने लगा। सिंगापुर के थिंक टैंक आईएसईएएस-युसोफ इशाक इंस्टीट्यूट की एसोसिएट फेलो टीटा सांगली के मुताबिक, इस घटना के बाद दोनों तरफ से खुद को रोकना विकल्प नहीं रह गया था और जनता का विश्वास जीतने के लिए जवाबी कार्रवाई को विकल्प बना लिया गया। ऐसे में तनाव जल्दी खत्म होने की संभावना काफी कम है। 
विज्ञापन

एक और विश्लेषक के मुताबिक, हुन सेन, जो कि कंबोडिया के मौजूदा प्रधानमंत्री 'हुआ मानेत' के पिता हैं, वह इस संघर्ष को अपने बेटे को राजनीतिक स्तर पर मजबूत करने के मौके के तौर पर देख रहे हैं। हुआ मानेत कंबोडिया में अपने पिता की छांव से निकलने में कामयाब नहीं हुए हैं। ऐसे में हुआ सेन अब बेटे को एक युद्ध काल के नेता के तौर पर पेश कर आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें