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China Visit: श्रीलंकाई PM गुणवर्धने का चीन दौरा खत्म, कर्ज का बोझ कम करने का जिनपिंग ने किया वादा; कही ये बात

Sat, 30 Mar 2024 09:31 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका की आर्थिक कठिनाईयों को दूर करने के लिए श्रीलंकाई प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने चीन यात्रा पर थे, जो खत्म हो गया है। संयुक्त बयान के मुताबिक, दिनेश गुणवर्धने की यात्रा के दौरान दोनों देश बेल्ट एंड रोड सहयोग को गहरा करने, बेल्ट एंड रोड सहयोग योजना के निर्माण में तेजी लाने और कोलंबो पोर्ट सिटी परियोजना और एकीकृत विकास परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
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दिनेश गुणवर्धने-शी जिनपिंग - फोटो : X/@SpokespersonCHN
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विस्तार
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नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका की आर्थिक कठिनाईयों को दूर करने के लिए श्रीलंकाई प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने चीन यात्रा पर थे, जो आज पूरी हो गई है। इस दौरान श्रीलंका ने शनिवार को एक संयुक्त बयान में कहा गया कि चीन श्रीलंका की वित्तीय कठिनाईयों को कम करने और ऋण स्थिरता हासिल करने के अपने प्रयास में सकारात्मक भूमिका निभाएगा, जबकि श्रीलंका बीआरआई सहयोग परियोचना के निर्माण में तेजी लाएगा। 
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दिनेश गुणवर्धने ने की थी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने ने चीन की अपनी आधिकारिक सप्ताह भर की यात्रा पूरी की। संयुक्त बयान में एशिया वार्षिक सम्मेलन के लिए बोआओ फोरम में भाग लेने के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ उनकी बातचीत के दौरान चर्चा किए गए समझौतों की मुख्य बातें सामने आईं।

बेल्ट एंड रोड सहयोग में तेजी लाने पर जोर
दिनेश गुणवर्धने की यात्रा के दौरान दोनों देश बेल्ट एंड रोड सहयोग को गहरा करने, बेल्ट एंड रोड सहयोग योजना के निर्माण में तेजी लाने और कोलंबो पोर्ट सिटी परियोजना और एकीकृत विकास परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। संयुक्त बयान में कहा गया है कि हंबनटोटा बंदरगाह दोनों देशों के बीच बेल्ट और रोड सहयोग की हस्ताक्षर परियोजना है।
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गौरतलब है कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) चीन की महत्वाकांक्षी बहु देशीय विविध बुनियादी ढांचा परियोजना है। संयुक्त बयान के मुताबिक, श्रीलंका अपनी वित्तीय व्यवहार्यता की आलोचना के बावजूद बीआरआई सहयोग योजना के निर्माण में तेजी लाने पर सहमत हुआ है।

चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता था
जब श्रीलंका ने 2022 में अपने पहले संप्रभु डिफॉल्ट की घोषणा की थी, तब चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता था, जिसके पास 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के विदेशी ऋण का 52 प्रतिशत हिस्सा था। श्रीलंका को ऋण देने वाले सत्रह देशों ने ऋण पुनर्गठन वार्ता के कदमों पर चर्चा करने के लिए पिछले साल एक समिति का गठन किया था, लेकिन चीन ने केवल पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेना पसंद किया।
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