विक्रमसिंघे राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की व्यापक समीक्षा इसलिए चाहते हैं ताकि उभरती हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विता में उलझनों से मुक्ता रास्ता तैयार किया जा सकते और हिंद महासागर में तटस्थता बनाए रखी जा सके। राष्ट्रपति ने समकालीन सुरक्षा नीतियां तैयार करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट करने के लिए एक सेवानिवृत्त मेजर जनरल के नेतृत्व में एक टीम पहले ही नियुक्त कर दी है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिदृश्य हिंद-महासागर क्षेत्र में वैश्विक शक्ति संघर्षों के अतिक्रमण का गवाह है। विक्रमसिंघे ने कहा,'एक मोर्चे पर प्रशांत महासागर के पार अमेरिका और चीन के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। इसके साथ ही यूक्रेन के संदर्भ में पश्चिमी देशों और रूस के बीच एक शक्ति संघर्ष उभरा है। यह प्रतिस्पर्धा अफ्रीका में नाइजर जैसे दूरदराज के इलाकों तक फैली हुई है।'
विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका को हिंद महासागर क्षेत्र में तटस्थता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'निस्संदेह, हिंद महासागर दुनिया के महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों की मेजबानी करता है, जिससे श्रीलंका इस स्तर पर एक अभिन्न खिलाड़ी बन जाता है। जैसा कि हम इन जल क्षेत्रों में नौपरिवहन का संचालन करते हैं, यह जरूरी है कि हम एक निष्पक्ष रुख बनाए रखते हुए इन अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों में उलझनों से मुक्त एक रास्ता तैयार करें। हमारी सबसे बड़ी चिंता इस क्षेत्र में हमारी सुरक्षा होनी चाहिए।'
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में पनडुब्बियों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसलिए, द्वीप राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा रणनीति को पनडुब्बी निगरानी और नियंत्रण के अनुरूप एक मजबूत कार्यक्रम के विकास की दिशा में निर्देशित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, समीक्षा रिपोर्ट के संकलन के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आधुनिक सुरक्षा नीतियों के लिए एक खाका अपनाया जाएगा। आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका को रक्षा खर्च के लिए बड़े बजटीय आवंटन को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है क्योंकि उसका स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा बजट कम है।