श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मौलिक अधिकारों की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे राष्ट्रपति चुनाव की देरी हो सकती है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना को आदेश दिया कि 30 अगस्त से पहले ईस्टर टेरर अटैक पीड़ितों को मुआवजा भुगतान पूरा करें।
श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने आज दो बड़े मामलों में अहम फैसला लिया है। शीर्ष अदालत ने पहले तो मूल अधिकारों से जुड़ी याचिका सोमवार को खारिज कर दी जिसकी वजह से देश में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में देरी हो सकती थी। वहीं दूसरे मामले में देश के पूर्व राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना को 30 अगस्त से पहले 2019 के ईस्टर आतंकी हमलों के पीड़ितों को मुआवजे का पूरा भुगतान निपटाने का आदेश दिया।
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याचिकाकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने लगाया जुर्माना
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पेशे से वकील याचिकाकर्ता पर भी जुर्माना लगाया, जिसने राष्ट्रपति चुनाव को स्थगित करने को लेकर याचिका दायर की थी। वकील ने याचिका में दावा किया कि साल 2015 में किया गया 19वां संविधान संशोधन तय प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ क्योंकि इसे अंगीकार करने के लिए कोई जनमत संग्रह नहीं कराया गया था। बता दें कि यह दूसरी याचिका है जो 17 से 16 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के खिलाफ दायर की गई।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे पर विपक्षी दलों ने लगाया आरोप
देश में विपक्षी दलों का आरोप है कि ये याचिकाएं मौजूद राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की ओर से दायर कराई जा रही हैं ताकि राष्ट्रपति चुनाव में देरी हो और वह बिना चुनाव के राष्ट्रपति बने रहें। विपक्ष का आरोप है कि रानिल विक्रमसिंघे चुनाव का सामना करने से डर रहे हैं। हालांकि, रानिल विक्रमसिंघे ने भरोसा दिया है कि निष्पक्ष निर्वाचन आयोग की देखरेख में समय पर चुनाव होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट का पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना पर बड़ा फैसला
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना को 30 अगस्त से पहले साल 2019 के ईस्टर आतंकी हमलों के पीड़ितों को मुआवजे का पूरा भुगतान निपटाने का आदेश दिया। वहीं पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ईस्टर हमले के पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर दिए जाने वाले 100 मिलियन रुपये में से 58 मिलियन रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं और उन्होंने बाकी राशि का भुगतान करने के लिए छह साल का समय भी मांगा है।
2019 में नेशनल तौहीद जमात ने किया था हमला
साल 2019 में आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामी चरमपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) से जुड़े आत्मघाती हमले में ईस्टर रविवार को 11 भारतीयों समेत 270 से अधिक लोग मारे गए थे। जनवरी 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक मौलिक अधिकार याचिका में सिरिसेना, तत्कालीन राष्ट्रपति और उनकी पुलिस और रक्षा पदानुक्रम को पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया था।