मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) ने बताया कि उन्होंने इस अभियान में पुलिस बल की भूमिका को लेकर पुलिस के उच्च पदस्थ अधिकारियों से बात की। इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
श्रीलंका में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। इस चुनाव से पहले सार्वजनिक स्थानों से अवैध चुनावी पोस्टरों और कटआउट को हटाने के लिए 1500 कर्मचारियों को तैनात किया। इसी के साथ पुलिस ने 21 सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए कानूनों का उल्लंघन करने वाली सभी चुनाव प्रचार सामग्री पर नकेल कसने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। इसके लिए अतिरिक्त श्रमिकों की भर्ती की गई है।
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श्रमिकों को किया जाएगा प्रतिदिन भुगतान
चुनाव के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस उप निरीक्षक (एसडीआईजी) असंका कराविता ने कहा कि श्रमिकों को प्रतिदिन 1500 रुपये का भुगतान किया जाएगा और उन्हें अवैध चुनावी पोस्टरों को हटाने के कार्य को पूरा करने के लिए पुलिस सुरक्षा की दी जाएगी। सभी अवैध पोस्टरों, बैनरों और कटआउट्स को हटाया जाएगा। चुनाव कानून सार्वजनिक स्थानों में चुनाव प्रचार सामग्री को प्रदर्शनत करने की अनुमति नहीं देता है। उम्मीदवार इन्हें केवल अपने कार्यलयों में प्रदर्शित कर सकते हैं।
मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) ने बताया कि उन्होंने इस अभियान में पुलिस बल की भूमिका को लेकर पुलिस के उच्च पदस्थ अधिकारियों से बात की। इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एचआरसी आयुक्त ने कहा, हमने दिशानिर्देशों पर व्यपक बातचीत की। मौजूदा स्थिति में पुलिस बिना प्रमुख के हैं। उच्चतम न्यायालय ने पुलिस प्रमुख को निलंबित कर दिया है। उन्हें उनकी नियुक्ति को लेकर दायर मौलिक अधिकार याचिका के आधार पर निलंबित किया गया है। इस मामले की सुनवाई चुनाव के बाद होगी।
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इन तीन नेताओं के बीच कांटे की टक्कर
चुनाव आयोग ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या को देखते हुए मतपत्र 2019 की तुलना में अधिक जानकारी वाला होगा। इस बार 39 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। 2019 में उम्मीदवारों की संख्या 35 थी। इस चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे, मुख्य विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा और मार्क्सवादी जेवीपी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच कांटे की टक्कर है।