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Sri Lanka: अब 'अशोक वाटिका' को विकसित कर अपनी अर्थव्यवस्था सुधारेगा श्रीलंका, जानें क्यों खास है यह स्थल?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 24 Apr 2023 08:02 PM IST

सार

प्रधानमंत्री दिनेश गुणावर्धने ने अशोक वाटिका स्थल पर एक 'ध्यान केंद्र' की आधारशिला रखी। यह स्थल ऐतिहासिक नुवरा एलिया शहर में पड़ता है। यहीं, प्रधानमंत्री के द्वारा सीता मंदिर वाले एक विशेष स्मारक कवर का अनावरण किया गया। 
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सीता मंदिर के विशेष कवर का अनावरण करते श्रीलंका के प्रधानमंत्री - फोटो : SOCIAL MEDIA
श्रीलंका की सरकार ने रामायण कालीन अशोक वाटिका स्थल को विकसित करने की पहल की है। प्रधानमंत्री दिनेश गुणावर्धने ने रविवार को अशोक वाटिका स्थल पर एक 'ध्यान केंद्र' की आधारशिला रखी। उन्होंने ऐतिहासिक नुवरा एलिया स्थित सीता मंदिर वाले एक विशेष स्मारक कवर का अनावरण भी किया।
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सीता मंदिर के विशेष कवर का अनावरण करते श्रीलंका के प्रधानमंत्री - फोटो : SOCIAL MEDIA
श्रीलंका की सरकार ने रामायण कालीन अशोक वाटिका स्थल को विकसित करने की पहल की है। प्रधानमंत्री दिनेश गुणावर्धने ने रविवार को अशोक वाटिका स्थल पर एक 'ध्यान केंद्र' की आधारशिला रखी। उन्होंने ऐतिहासिक नुवरा एलिया स्थित सीता मंदिर वाले एक विशेष स्मारक कवर का अनावरण भी किया।

नुवरा एलिया - फोटो : SOCIAL MEDIA
अशोक वाटिका स्थल को लेकर श्रीलंका में क्या हुआ है?
प्रधानमंत्री दिनेश गुणावर्धने ने अशोक वाटिका स्थल पर एक 'ध्यान केंद्र' की आधारशिला रखी। यह स्थल ऐतिहासिक नुवरा एलिया शहर में पड़ता है। यहीं, प्रधानमंत्री के द्वारा सीता मंदिर वाले एक विशेष स्मारक कवर का अनावरण किया गया। उनके साथ भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले भी मौजूद थे।

अशोक वाटिका स्थल का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
श्रीलंका के दक्षिणी भाग में एक छोटा सा शहर है ईला। नुवरा एलिया प्राकृतिक रुप से जितना खूबसूरत है उतना ही रहस्यमय और रोमंचकारी है। हिंदू महाकाव्य रामायण में इसके बारे में माना जाता है कि रावण ने सीता को यहीं बंदी बनाकर रखा था।

प्राचीन इतिहास के अनुसार, दशानन रावण की लंका सोने की थी। अशोक वाटिका उसी का हिस्सा थी। रामायण काल के कुछ प्रमाण अभी भी वहां मौजूद हैं। बगीचे का नाम अशोक के पेड़ के नाम पर रखा गया था। 

नुवरा एलिया - फोटो : SOCIAL MEDIA
यहां और कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं?
नुवरा एलिया में अनेक प्राचीन स्थल हैं जिसमें रावण गुफा काफी मशहूर है। कहते हैं इसी गुफा में रावण ने तपस्या की थी। मान्यता है कि यहीं रावण ने सीता को बंदी बनाकर भी रखा था। यह गुफा अंदर सुरंग की तरह है। कहते हैं इस गुफा से निकलकर एक रास्ता रावण जलप्रपात तक जाता था। मान्यता है कि रावण गुफा से निकलकर यहां पर आता था और स्नान किया करता था। रावण जलप्रपात के करीब पहुंचना बहुत ही कठिन है। इसलिए श्रीलंका सरकार ने गुफा के पीछे एक और जल प्रपात बनवाया है उसे ही रावण जलप्रपात का नाम दे दिया है।

रावण के विषय में मशहूर है कि उसके पास एक पुष्पक विमान हुआ करता था। इस विमान को रावण ने कुबेर से छीना था। रावण ने विमान को रखने के लिए कई हवाई अड्डे बना रखे थे। इनमें एक हवाई अड्डा नुवरा एलिया में भी रावण गुफा के पास था जिसे हनुमान जी ने नष्ट कर दिया था।

नुवरा एलिया में गायत्री शक्तिपीठम है। यहां पर रावण और उसके पुत्र मेघनाद ने तपस्या की थी। माना जाता है कि इसी स्थान पर मेघनाद ने अजेय होने के लिए निकुंभ यज्ञ भी किया था। यहां रावण द्वारा बना गया गर्म पानी का जल स्रोत भी है।

नुवारा एलिया - फोटो : SOCIAL MEDIA
अशोक वाटिका स्थल भारतीय सैलानियों के लिए क्यों खास है?
पांच हजार साल से ज्यादा हो गए। श्रीलंका में रामायण काल के ऐतिहासिक अवशेष आज भी पूरी दुनिया में चर्चा के केंद्र में हैं। नुवरा एलिया स्थिति अशोक वाटिका भी एक ऐसा ही स्थान है। भारत सहित पूरे विश्व से पर्यटक यहां पहुंचते हैं और श्रीलंका पहुंचकर एक अलग ही अनुभूति का अहसास करते हैं।

अशोक वाटिका के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही एक अजीब अनुभूति का एहसास होता है। इस जगह से भारतवासियों की विशेष जुड़ाव है। यही वजह है कि जो भी हिंदुस्तानी यहां पहुंचता है तो खुद को भाग्यशाली समझता है। श्रीलंका सरकार ने अशोक वाटिका को अब नया दर्शनीय स्वरूप दे दिया है।

बीते कुछ साल में सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर पूरे क्षेत्र का आधुनिकीकरण कर दिया है। मंदिर से लेकर पूरे परिसर को संगमरमर से सुसज्जित कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम हैं और वहां रोजाना हजारों विदेशी पर्यटक सीता माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वाटिका में प्रवेश निशुल्क है। श्रद्वालुओं से किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं वसूला जाता।

नुवरा एलिया स्थित सीता वाटिका अब श्रीलंका का हिल स्टेशन माना जाता है। वाटिका की कुछ दूरी पर एक बड़ी सी झील है जिसका पानी गहरा नीला है। यह स्थान बौद्व की प्रसिद्व स्थली कैंडी से सत्तर-अस्सी किलोमीटर दूर है। अशोक वाटिका में राम-सीता का भव्य मंदिर है, जहां श्रद्वालु श्रद्वा से अपना सिर झुकाकर मन्नत मांगते हैं। सुबह-शाम आरती होती है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
 
हनुमान के पद्चिन्ह
सीता वाटिका में हनुमान के पद्चिन्ह आज भी मौजूद हैं। वहां के पुजारी शिवराज शर्मा बताते हैं कि जब हनुमान सीता को खोजते-खोजते पहली बार वाटिका में आए थे, तो उनका पहला कदम जिस जगह पर पड़ा था वहां बड़ा सा गड्ढा बना हुआ है। 

विदेशी श्रद्वालुओं के लिए है जिज्ञासा का विषय 
श्रीलंका में भारत के अलावा दूसरे देशों के पहुंचने वाले श्रद्वालुओं में सीता वाटिका के इतिहास के संबंध में जानने की अभिरुचि ज्यादा रहती है। हालांकि इसके लिए वहां के व्यवस्थापकों ने पूरे इंतजाम किए हैं। रामायण व पुराने अभिलेखों के माध्यम से वहां के लोग विस्तार से बताते हैं। 

माता सीता के हरण के बाद रावण कब-कब वाटिका में आता था, सुरक्षा में कितनी दासियां लगाई थीं, पहरेदारी कैसी की गई थी, ऐसी तमाम बातें वहां के लोग बड़ी तल्लीनता से समझाते हैं। देश के पर्यटन विभाग के मुताबिक श्रीलंका ने इस साल मार्च में 1.25 लाख से अधिक पर्यटकों का स्वागत किया, जिसमें अधिकांश आगमन रूसी और भारतीय थे। 

ramayana tour sri lanka - फोटो : Agency (File Photo)
पर्यटन, श्रीलंका की आय का एक अहम स्रोत 
पर्यटन क्षेत्र श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा आय का मुख्य स्रोत है। हालांकि, 2020 में महामारी की शुरुआत ने इस क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया। यह श्रीलंका की आर्थिक कठिनाइयों के प्रमुख कारणों में से एक था। 
श्रीलंका पिछले साल से एक बड़े आर्थिक, मानवीय और राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। आर्थिक संकट से निपटने में सरकार की गलती के कारण पिछले साल अप्रैल से श्रीलंका में सरकार के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सितंबर 2022 में आईएमएफ ने देश को अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से उबरने में मदद करने के लिए 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज की घोषणा की।
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