सरकार ने जो प्रारूप पेश किया है, उसे अब संसद में पेश किया जाएगा। स्पेन की संसद में इसे मंजूरी मिल जाएगी, ये अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। पर्यवेक्षकों के मुताबिक संसद की चर्चा के दौरान मुमकिन है कि सरकार को विधेयक के कुछ प्रावधानों में फेरबदल करना पड़ जाए।
वहीं, अगर बिल पारित हो गया, तो स्पेन दुनिया के उन गिने- चुने देशों में शामिल हो जाएगा, जहां बिना लिंग परीक्षण के खुद अपनी लिंग पहचान तय करने की स्वतंत्रता मिली हुई है। ज्यादातर देशों में ऐसी पहचान तय करने के पहले संबंधित व्यक्ति की शारीरिक बनावट की जांच की जाती है।
लेकिन दुनिया भर में एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों की ये मांग रही है कि उन्हें अपनी लिंग पहचान खुद तय करने का अधिकार दिया जाए।
स्पेन के इस प्रस्तावित कानून में यह प्रावधान भी किया गया है कि किसी व्यक्ति की लिंग पहचान बदलने की प्रक्रिया एक निश्चित समय में पूरी की जाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये कानून अगर पारित हो गया, तो स्पेन दुनिया का सबसे अधिक तेज गति से इस प्रक्रिया को पूरा करने वाला देश बन जाएगा। इस बिल में प्रावधान है कि किसी व्यक्ति के अपनी लिंग पहचान बदलने की अर्जी देने के बाद चार महीनों के अंदर सभी सरकारी दस्तावेजों में ये परिवर्तन किया जाएगा।
लेकिन कुछ नारीवादी संगठनों ने इस कानून का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये कानून शारीरिक लिंग की धारणा को ही धूमिल कर देता है। लेकिन ट्रांसजेंडर समुदाय और उसके अधिकारों के हक में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कानून उनकी अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता। इसमें ऐसे प्रावधान हैं, जिनकी वजह से 14 से 16 वर्ष की उम्र के बीच के लोगों को लिंग पहचान बदलवाने के लिए अपने माता-पिता की सहमति का साक्ष्य देना होगा।